शायरी – मैं तो जिंदा हूं, तेरा ख्वाब जो सलामत है

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तेरी यादों के जज्बात इस कदर छलके
मेरी आंखों के पैकर से अब जहर छलके

मैं तो जिंदा हूं, तेरा ख्वाब जो सलामत है
रात दिन तेरा ही चेहरा हर पहर झलके

अब किसी राह की ख्वाहिश नहीं दिल में
हमने जब देख लिया तेरी रहगुजर चलके

चांद के नूर की तलाश में भटकता हुआ
बुझ गया है वो गर्दिश का सितारा जलके

©राजीव सिंह शायरी

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