था इश्क का ये खून जो शायरी ईमेज

इश्क का खून ईमेज शायरी

सूने महल की सेज पर तन्हा सा बादशाह था
जब लुट गई रियासतें, कोई साथ भी न रह गया

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आंसुओं में बसा दर्द निकलता नहीं, हुआ इश्क का खून मगर दिल मरता नहीं, ये फिर मचलता है नया दर्द पाने के लिए।

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