जैसे सागर बिना चांद के शायरी ईमेज

सागर बिना चांद ईमेज शायरी

मेरा मंजर सुनहरा था, अब बेरंग हुआ
जैसे सागर बिना चांद के उदास हुए

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तू गुलाब है, तू शबाब है मेरी जानेजा तू लाजवाब। तुझे देख लिया जबसे दिल ने इसे इश्क हुआ बेहिसाब है। बता तेरा क्या जवाब है।

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