ये चांद भी तेरे नूर की शायरी ईमेज

चांद का नूर शायरी ईमेज

ये इश्क का इंसाफ है, कि तेरी हर खता मुआफ है
इस गुनाह को कुबूल कर खुद को सजा हमने दिए

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यूं ही नहीं तेरे दीवाने हैं हम, तेरे आशिक मस्ताने हैं हम, जिंदगी के हर पल में तेरी ख्वाहिश जगी है, इस दिल में तुझे पाने की आग लगी है।

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