आंखों से जुदा ईमेज शायरी

जुदाई इश्क शायरी ईमेज

आज टुकड़ों में बंटे हैं बादल की तरह
आज दरिया भी हो जाएंगे आंखों से जुदा

सदियों से आशिक तलबगार है तेरा, ये दिल तुमसे मिलने को बेकरार है कितना, तुम इस सवाल का जवाब नहीं देती हो, कि कब तक है हमें जुदाई को सहना।

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