रात का आलम बंजर है शायरी ईमेज

इश्क की रात शायरी ईमेज

चांद सुलगता पत्थर है, रात का आलम बंजर है
मेरे लम्हों के मंजर में कोई सुबह न शाम है

अपना जख्म लेकर हम तुमसे दूर चले, इश्क में इतने दर्द सहे कि दुनिया छोड़ चले, ऐसे हालात में तुम भी तो नाता तोड़ चले।

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