महबूबा शायरी

जिंदगी की तलाश तुम और मेरी मंजिल है क्या

जिंदगी की तलाश तुम, और मेरी मंजिल है क्या दिल की हो प्यास तुम, और मेरी मंजिल है क्या तन्हाई ही तन्हाई है अब दूर तलक अफसाने में होगी कहानी पूरी तुमसे , और मेरी मंजिल है क्या

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जिंदगी की तलाश तुम, और मेरी मंजिल है क्या
दिल की हो प्यास तुम, और मेरी मंजिल है क्या

तन्हाई ही तन्हाई है अब दूर तलक अफसाने में
होगी कहानी पूरी तुमसे , और मेरी मंजिल है क्या

दुनिया में इस जिंदगी का कोई भी ठिकाना नहीं
तेरी बाहों में बस जाऊं, और मेरी मंजिल है क्या

किन लफ्जों में तुमसे कह दूं अपनी ये ख्वाहिशें
बिन कहे तुम समझ लो, हां मेरी मंजिल है क्या

©rajeevsingh              शायरी

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