शायरी संग्रह

शायरी संग्रह – आई हूं घर लौटकर तो उलझी सी हूं

शायरी - आई हूं घर लौटकर तो उलझी सी हूं मेरी सुबह से जाने कब शाम हो गई घरवाले पूछते हैं कि क्या हुआ है मुझे मेरी जिंदगी तो अब इम्तहान हो गई

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तुझे देखकर अचानक बेजान हो गई
तेरी आशिक नजर पे कुरबान हो गई

तुमको लबों से कुछ कह भी न सकी
इस कदर मैं दिल से परेशान हो गई

आई हूं घर लौटकर तो उलझी सी हूं
मेरी सुबह से जाने कब शाम हो गई

घरवाले पूछते हैं कि क्या हुआ है मुझे
मेरी जिंदगी तो अब इम्तहान हो गई

©rajeevsingh             हिंदी शायरी

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