दर्द भरे शायरी

मोम से ये वजूद मेरा बहुत जल्दी पिघलता है

आग बुझाने की कोशिश में सांस हम लेते रहे सीने में उठते धुएं से कतरा कतरा जल चुके मोम से ये वजूद मेरा बहुत जल्दी पिघलता है दुख के इतने सांचों में अब तक हम ढल चुके - शायरी

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जिंदगी तेरा इश्क शायरी
जिंदगी तेरे इश्क में कितनी दूर हम चल चुके
मिला सुकूं कहीं नहीं, कितने शहर बदल चुके

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