रिश्तों को निभाने की मजबूरी पुरानी है

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रिश्तों को निभाने की मजबूरी पुरानी है
जिंदगी तो जैसे समझौतों की कहानी है

दुनिया के अंदर तो धोखे का समंदर है
यहां करते हैं वफा, मिलती बदनामी है

यार बनाकर जिसने मेरा खून किया
उसके चेहरे पर शिकन न परेशानी है

जहां अक्ल वालों की महफिल है वहां
जिधर देखिए दिलवालों की नाकामी है

©rajeevsingh             शायरी

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