दिल का रिश्ते में नफरत भी हो जाती है

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घर से मजबूर हो जाए, ये मुमकिन है
वो कभी दूर चला जाए, ये मुमकिन है

दिल का रिश्ते में नफरत भी हो जाती है
यार भी दुश्मन बन जाए, ये मुमकिन है

इस दुनिया में जो अपनों से ठुकराए गए
कोई पराया उसे अपनाए, ये मुमकिन है

अब तेरे सामने मैं कोई सच नहीं कहता
बात तुमको बुरी लग जाए, ये मुमकिन है

©rajeevsingh       शायरी

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