कौन अपना है जो उसके सर पर हाथ रखे

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जाने किसके लिए जमाने के बाद तरसा है
उसका दिल आज रो कर बेपनाह बरसा है

कौन अपना है जो उसके सर पर हाथ रखे
अपनों से प्यार पाए हो चुका एक अरसा है

रिश्तेदारों की लड़ाई को देख देखकर अब
उसे रिश्तों के नाम से लग जाता डर सा है

मर रहा है रोज रोज घर में वो कतरा कतरा
उसकी जिंदगी में घुल रहा कुछ जहर सा है

©rajeevsingh             शायरी

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