शायरी – अपने समाज में आजादी कब मिलेगी

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फिरंगियों से तो आजादी मिल गई हमें
अपने समाज में आजादी कब मिलेगी

इस समाज के चप्पे चप्पे पर बैठें हैं जो
उन ठेकेदारों से आजादी कब मिलेगी

मुझे आगे बढ़ता देखकर जो जलते हैं
ऐसे रिश्तेदारों से आजादी कब मिलेगी

चारों तरफ इज्जत आबरू की दीवारें हैं
कैद से इश्क को आजादी कब मिलेगी

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