शायरी – शहर में भागती रही, तू फिर भी न मिला

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आंखों में हसीन

जिंदगी से मेरी मुलाकात तो यूं ही रह गई
मुझे पता भी न चला और ये गुजर भी गई

हंसते-हंसते जाने कब मेरा बचपन बीता
बड़ी हुई तब होठों से हंसी उतर भी गई

कुछ न था तो आंखों में हसीन दुनिया थी
अब सबकुछ है तो मेरी वो नजर भी गई

शहर में भागती रही, तू फिर भी न मिला
तेरी तलाश में कितनी बार ठहर भी गई

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