shayari – अजनबी रिश्तों की कोई निशानी नहीं जानी

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जवानी की महफिल शायरी इमेज

अजनबी रिश्तों की कोई निशानी नहीं जानी
अपने ही घर में किसी की कहानी नहीं जानी

दो पल साथ हों, किसी के पास वक्त कहां था
अपनों ने फिर अपनों की परेशानी नहीं जानी

जवानी की इन महफिलों में गुम होकर हमने
कभी बुजुर्गों की जिंदगी की वीरानी नहीं जानी

अक्लवाले ही बच जाएंगे इस दुनिया में शायद
यहां तो बच्चों ने बचपन की नादानी नहीं जानी

अश्को को छुपाने की मुश्किल कोशिश में वो
रो लेने से जीने में होती है आसानी नहीं जानी

©rajeevsingh                                     shayari

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