shayari – मेरे अंदर तेरे आने की ये आस बुझ जाए

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अपने होने का अहसास शायरी

मेरे अंदर तेरे आने की ये आस बुझ जाए
सोचता हूं मोहब्बत की ये प्यास बुझ जाए

उतार देती है दुनियादारी इश्क का नशा
रोजी रोटी की कभी तो तलाश बुझ जाए

रोशनी आती नहीं जिंदगी में कुदरत की
शहर में चांद सूरज बदहवास बुझ जाए

दूर निकल आया हूं अब खुद से कितना
कि अपने होने का भी अहसास बुझ जाए

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