जख्मी दिल शायरी

shayari – मेरे अपने मुझको कभी समझ नहीं सके

शायरी मेरे अपने मुझको कभी समझ नहीं सके रिश्तों में अहसास फिर पनप नहीं सके एक घर के अंदर भले हम संग संग रहे मगर दिल की दूरियां सिमट नहीं सके

shayari latest shayari new

जख्मी दिल की शायरी

मेरे अपने मुझको कभी समझ नहीं सके
रिश्तों में अहसास फिर पनप नहीं सके

एक घर के अंदर भले हम संग संग रहे
मगर दिल की दूरियां सिमट नहीं सके

कभी किसी ने अपना दर्द सुनाया नहीं
उनके सामने हम भी सिसक नहीं सके

एक दिल है उसमें जाने कितने जख्म हैं
आंखों से खून के कतरे टपक नहीं सके

shayari green pre shayari green next

Advertisements

Leave a Reply