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इंदौर से प्रीति की रियल लव स्टोरी – love story of priti fro indore

मैं हर रोज किशोर से भी बात करती हूं और मनीष से भी। मैं बहुत कंफ्यूज्ड हूं कि आगे क्या करूं? किधर जाऊं?

मेरा नाम प्रीति है। मैं 24 साल की हूं। मेरी प्रेम कहानी आज से चार साल पहले शुरू हुई थी। तब मैं अपने शहर के एक कॉलेज में पढ़ती थी। मेरे भाई, पापा या चाचा मुझे कॉलेज छोड़ने जाते थे। कॉलेज की पार्किंग एरिया में मैं रोज एक चेहरे को देखती थी जो मुझे अक्सर देखकर स्माइल करता रहता और जब मुझसे नजरें मिलती तो दूसरे तरफ देखने लगता था। वह हैंडसम था और मुझे वह पहली नजर में अच्छा लगा था। उसकी स्माइल बहुत प्यारी थी। यह उसका रोज का काम था और मैं उसको रोज इग्नोर कर देती।real love story

मेरे घर वाले मेरी दीदी और मेरे लिए रिश्ता खोज रहे थे। दीदी मुझसे थोड़ी सी बड़ी है। अचानक एक दिन मुझे पता चला कि दीदी से पहले मेरे लिए रिश्ता आया है तो मैं सोच में पड़ गई कि ऐसा कैसे हो गया। लड़के वाले हमारे घर आए तो मैं चौंक गई। वही पार्किंग एरिया में मुझे देखनेवाला लड़का अपनी फैमिली के साथ आया था। हम दोनों को कुछ देर के लिए अकेले में मिलने का समय दिया गया। हम दोनों छत पर गए। मैं थोड़ी डरी हुई थी और वह बोलता ही जा रहा था। उसने बताया कि उसकी बहन मेरे कॉलेज में मेरी सीनियर है और वह उसको छोड़ने रोज कॉलेज जाता था तभी उसने मुझे देखा था। एक ही कास्ट होने की वजह से वह रिश्ता लेकर आ गया। उस लड़के का नाम मनीष था।

मनीष ने शादी के बारे में मेरी राय पूछी तो मैं सोचने लगी। मैं उसको पसंद करने लगी थी लेकिन इतनी जल्दी मैंने हां कहना ठीक नहीं समझा। मैंने कह दिया कि घरवालों को रिश्ता मंजूर होगा तभी बात आगे बढ़ेगी। हम दोनों नीचे गए तो हमारी सगाई की बात चल रही थी। बाद में मेरी मनीष से सगाई हो गई और मुझे उससे प्यार भी हो गया। वह भी मुझसे बहुत प्यार करता था। लेकिन कुछ दिन बाद निजी कारणों से मैंने सगाई तोड़ दी। मनीष एटीट्यूड दिखाने लगा था। ब्रेकअप पर मैं बहुत टूट सी गई। मैं उसके लिए बहुत रोई और वह भी मेरे लिए बहुत रोया।

इसके बाद मनीष मेरा पीछा करने लगा। मैं जहां जाती, वह पीछे लग जाता। मैं अकेले कहीं नहीं जा सकती थी। मैंने उसका कॉल उठाना बंद कर दिया। मेरे घरवालों ने मेरा कॉलेज छुड़वा दिया। मैं मनीष का एटीट्यूड तोड़ना चाहती थी, उसे दिखाना चाहती थी कि मुझे उससे ज्यादा अच्छा लड़का मिल सकता है। मैं उसे भूलना चाहती थी। पर ना चाहते हुए भी वह याद आ ही जाता था। इस बात के छह महीने के बाद मैं पहले की तरह खुश रहने लगी थी।

इस बीच मेरी दीदी का रिश्ता भी आया और उनको देखने लड़केवाले आए। मैं अपने कजिन के साथ दूसरे कमरे में मस्ती कर रही थी। मेरे भाई ने उस दिन काली शर्ट पहन रखी थी। वह दिख नहीं रहा था तो मैं उसे खोजने लगी। खोजते-खोजते छत पर गई तो वहां काली शर्ट पहने एक लड़का दिखा जिसकी पीठ मेरी तरफ था। मैंने समझा मेरा भाई है और मैंने उसे धक्का दे दिया। वह गिरा तो मैंने देखा कि वह मेरा भाई नहीं, कोई और था जो लड़केवालों की तरफ से आया था। मेरी वजह से उसे चोट लगी थी। बाद में मुझे पता चला कि वह मेरी दीदी का होनेवाला देवर किशोर था।

दीदी का शादी हो गई। मैं किशोर की तरफ आकर्षित थी और शायद वह भी मुझे लाइक करता था। कुछ दिनों बाद दीदी ने अपनी ससुराल में मुझे कुछ दिन साथ रहने के लिए बुलाया। मैं चली गई। वहां एक दिन किशोर ने मुझे प्रपोज कर दिया और मैंने भी एक्सेप्ट कर लिया। लेकिन मैं अभी भी मनीष को भुला नहीं पाई थी इसलिए यह बात बताने के लिए मैंने उसको फोन किया। मनीष ने जवाब में कहा कि मुझे जलाना पूरा हो जाए तो बताना, तुम बस मेरी हो और तुम्हारी शादी बस मुझसे होगी। वह थोड़ा पागल है लेकिन बहुत अच्छा है।

इधर मेरे और किशोर के रिश्ते के बारे में घरवालों को पता चल गया। हमारी सगाई कर दी गई। अब मैं हर रोज किशोर से भी बात करती हूं और मनीष से भी। मैं बहुत कंफ्यूज्ड हूं कि आगे क्या करूं? किधर जाऊं?

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