संध्या की प्रेम कहानी – real love story of sandhya

मेरा नाम संध्या है। मेरी लव स्टोरी 2014 से स्टार्ट हुई। 2014 में एमसीए पास करने के बाद मैं जॉब सर्च करने लगी। मुझे एक कॉलेज फ्रेंड की मदद से पहली नौकरी मिली।

real love story

जॉब पाकर मैं बहुत खुश हुई। ऑफिस जाने लगी। मैं जिस टीम में थी, उसमें कोई और लड़की नहीं थी। रिसेप्शन पर बैठने वाली रचना रावत की ज्वाइनिंग मेरे साथ ही हुई थी। हम दोनों ही ऑफिस में नए थे इसलिए जल्दी दोस्ती भी हो गई। हम दोनों रोज साथ लंच करने लगे।

रचना रोज किसी न किसी बहाने से हमारी टीम के पास आती थी। एक दूसरी टीम को लीड करने वाले मुकेश ने मुझे अपनी बहन बना लिया था और उसका व्यवहार भी भाई जैसा था। मुझे बाद में पता चला कि रचना और मुकेश के बीच कुछ-कुछ चल रहा है और मैं यह जानकर खुश थी कि मेरी दोस्त मेरी भाभी बनेगी।

ऑफिस में मुकेश ने अपनी सीनियर मैम से कह रखा था कि मेट्रो तक वो मेरे साथ जाया करे। उस सीनियर मैम के साथ मुकेश का दोस्त दीपक भी जाता था। वह भी टीम लीडर था। दीपक और मेरे घर का रास्त एक ही थी, इसलिए हम दोनों के बीच जान-पहचान हो गई।

दीपक को मैं सीनियर मानती थी। कुछ दिनों बाद मैंने जॉब छोड़ने का मन बनाया तो मैंने यह बात दीपक को बताई तो वह मुझे समझाने लगा। फिर बाद में मुकेश मुझसे कहने लगा कि दीपक बहुत अच्छा लड़का है, तुमको चाहता है, अब तुम भी हां कर दो। मुझे भी दीपक अच्छा लगता था इसलिए मैंने यह रिश्ता एक्सेप्ट कर लिया।

शुरू में दीपक बहुत अच्छा रहा। दीपक का एक दोस्त अमित अपनी गर्लफ्रेंड को बहुत मारता था तो मुझे डर लगता कि कहीं दीपक भी तो ऐसा नहीं करेगा। मैं दीपक से पूछती तो वह कहता कि बाबू मैं कभी नहीं करूंगा ऐसा। दो महीने तक सब ठीक चलता रहा।

दो महीने बाद मेरी टीम को दूसरे ऑफिस में शिफ्ट किया जाना था। यह जानते ही दीपक बहुत रोया और कहने लगा कि बाबू इस ऑफिस से मत जाओ। दीपक ने अपने मैनेजर से बात करके मुझे अमित की टीम में शिफ्ट में करवा दिया। मैं अमित की गर्लफ्रेंड को देखकर डरती रहती थी जिससे वह मारपीट करता था।

मुझे खुद पता नहीं था कि मेरा डर सही साबित होगा। दीपक ने भी मुझ पर हाथ उठाना शुरू कर दिया। मैं रोज दीपक के लिए खाना लेकर जाती थी लेकिन पता नहीं उसको क्या हो गया था। वह घरवालों का गुस्सा मुझ पर उतारने लगा था। मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और हम दोनों का रिश्ता टूट गया।

इस बात को आठ महीने बीत चुके हैं। एक दिन भी ऐसा नहीं गया जब उसको याद करके मैं रोई नहीं। अब मैं किसी पर कैसे ट्रस्ट कर सकती हूं। मुझे पीटने के बाद वह भी रोता था। मैं उससे बहुत प्यार करती थी।

मैं अपनी स्टोरी बताकर यह आपसे कहना चाहती हूं कि प्यार करो लेकिन इतने पागल मत बनो कि सामने वाला आप पर हाथ उठाए, गाली दे और आप कुछ ना बोलो।

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