love story

मध्य प्रदेश से कपिल की लव स्टोरी – love story of Kapil from Madhya Pradesh

खुश इसलिए क्योंकि वो आज खुश है और दुख इस बात का है वो हाथ की लकीरों तक सीमित रह गई। काश, वो मेरी माथे की लकीरों में शामिल हो जाती।

दोस्तों, मेरा नाम कपिल है , मैंने आज से 4 साल पहले मेरे शहर के पास पोहरी से आईटीआई की थी। कॉलेज में मेरा पहला दिन था, सारे स्टूडेंट्स अलग-अलग जगहों से अए थे। मेरे कॉलेज में कई लडकियां थीं लेकिन एक-एक करके सब लड़कियों ने कॉलेज आना बन्द कर दिया।

love story by kapil

अब पूरे कॉलेज में एक लड़की पढती थी जिसका नाम था रिज़ा खान। धीरे-धीरे हम दोनों काफी क्लोज फ्रेंड बने, एक दूजे की हर बात शेयर करते थे।

रिज़ा के शहर से कॉलेज 5 km दूर था, इस वजह से वो अपनी स्कूटी साथ में लाती थी। चूंकि मेरा शहर उसके शहर से 20 km की दूरी पर था तो वो रोज मुझे रोज बस स्टैंड ड्रॉप करती थी।

कॉलेज की छुट्टी होने के बावजूद मैं घर से कॉलेज जाने की बात कह कर आता था और रिज़ा के घर पर उसके साथ बैठकर घंटों पढ़ाई करता था। रिज़ा अपने मां-बाप के साथ रहती थी।

मैं उसे दिलोजान से चाहने लगा था और मुझे उसके पास्ट के बारे में भी पता था क्योंकि जैसा कि मैं आपको बता चुका हूं कि हम दोनों काफी क्लोज थे और सारी बातें शेयर करते थे। हम एक साथ कॉलेज में लंच करते थे।

हमारा 2 साल का कोर्स था सो समय का पता भी नहीं चला और लास्ट दिन उसने मुझे अकेले में, जब क्लास के सब लोग चले गए, तब रुकने के लिए बोला। सब दोस्त जैसे ही बाहर निकले, उसने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और मुझे जोर से Hug करते हुए बोली – कपिल, बहुत बुरा लग रहा है जाने क्यूं। पता नहीं आज के बाद हम कब और कैसे मिलेंगे?

और उसने मुझे दर्द भरी आवाज में Bye बोला। मैं भी अपने आप को उस वक़्त रोक न पाया और मैंने उसे अपने दिल का हाल सुनाया।

मैंने उससे कहा – मैं तुम्हें प्यार करता हूं और जिंदगीभर करता रहूंगा। तुम भले चली जाओ आज, मगर मैं हमेशा इंतजार करुंगा तेरा। ये सब सुनकर उसने कोई जवाब नहीं दिया।

कुछ दिनों बाद उसने मुझे कॉल किया और बोली – कपिल! ऐसा नहीं है कि तुम मुझसे प्यार नहीं करते हो। तुम करते हो, ये तो पक्का है। लेकिन मैंने जैसा तुम्हें अपनी लाइफ के बारे में बताया है कि मैं जिस लड़के से प्यार करती हूं, उसे मैंने छोड़ दिया था।

वो फिर बोली – कपिल, मैंने जितना उसे दुख दिया है, तुम्हें नहीं देना चाहती। वो गलत था उस वक़्त पर आज तुम सही हो। मैं तुम्हारी बात को मान भी लेती हूं तो इसका एक असर हमारी फैमिली पर भी पड़ेगा।

वो बोलती रही – मेरी मां को विश्वास है तुम पर। वो समझती है कि तुम मेरे गाइड हो, एक अच्छे दोस्त हो। जब उन्हें पता लगेगा तो सब ख़त्म हो जायगा।

वो बोलती रही। मैं सुनता रहा क्योंकि उस वक़्त हाथ-पैर तो दूर की बात है, जुबान भी साथ नहीं दे पा रही थी।

जब उसने मुझे बोलने को कहा, मैं तब चंद शब्द ही बोल पाया। मैं बोला – पगली मेरा मकसद किसी का दिल दुखाना नहीं है। हम अच्छे दोस्त थे, हैं और हमेशा रहेंगे। बस एक वादा करो।

वो बोली – क्या ?

मैं रोते हुए बोला – इस नाचीज को कभी भूल न जाना।

वो बोली रोते-हंसते हुए- पागल है क्या।

दोस्तों यहां पर आकर हमारी स्टोरी समाप्त हुई। आज वो अकेली नहीं, उसके पास कई दोस्त हैं। याद करती है, कॉल करती है। मन करता है जब उससे मिल आता हूं।

पर दिल है न बहुत बुरा है। आज 4-5 साल बाद भी उसकी याद 1 second भी पीछा नहीं छोड़ती। बस जब भी उसे मेरी याद आती है। मैं उससे मिलने जाता हूं। आज खुश हूं और दुखी भी हूं।

खुश इसलिए क्योंकि वो आज खुश है और दुख इस बात का है वो हाथ की लकीरों तक सीमित रह गई।

काश, वो मेरी माथे की लकीरों में शामिल हो जाती।


Story by Kapil Nam Dev, Shivpuri, Madhya Pradesh.

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