shayari – तन्हाई के आलम में जब तेरी याद होती है

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मुंतजिर जिंदगी शायरी

तन्हाई के आलम में जब तेरी याद होती है
आंखों में ठहरे अश्कों की बरसात होती है

वजूद मेरा है मगर तुम इस कदर समाए हो
जिस्मो जान में, ख्यालों में तेरी बात होती है

काश हमें तुमसे कभी मोहब्बत ही न होती
यही सोचने में दिन से अब मेरी रात होती है

तेरे बिन मेरे दिल की दुनिया बेजान सी हुई
रोज तेरे लिए मुंतजिर जिंदगी हताश होती है

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