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छपरा, बिहार से धर्मेंद्र की लव स्टोरी – chhapra bihar se dharmendra ki prem kahani

आखिर दोस्त दोस्त होता है। आज तक मैं हेमा के इंतजार में हूं कि वो कभी तो मेरे से बात करेगी तो मैं उससे बोलूंगा कि तुमसे अच्छा तो मेरा दोस्त है जो समय पे मेरे साथ था। इसलिए दोस्तों दोस्त का साथ कभी मत छोड़ना।

मेरा नाम धर्मेन्द्र कुमार है। मैं बिहार के छपरा जिले के नवादा गांव का निवासी हूं। मुझे अपने ही गांव की लड़की से प्यार हो गया। फिर मैंने सोचा कि कैसे इसे अपना बनाया जाय। मैं तो उसका नाम बताना ही भूल गया। उसका नाम हेमा था लेकिन प्यार हो जाने के बाद मैं उसे सोना बुलाने लगा था।

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मेरा एक दोस्त था, उसका नाम पिंटू था, वो मेरी सब बात जानता था। मुझे हिम्मत नहीं होती थी कि मैं हेमा से कुछ कहूं। पिंटू मुझे बार बार कहता कि बोल दे, प्यार का इजहार करने में नहीं डरना चाहिए, वो भी तुझसे प्यार करती है।

पिंटू के इस बात के बाद मैंने गौर किया कि वो भी मुझे छुप छुप कर देखती है तब मैंने किसी तरह हिम्मत करके उससे अपने प्यार का इजहार किया तो वो मुझसे आकर लिपट गई और बोली कि मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूं।
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इस तरह 2007 से हम लोगों का प्यार शुरू हुआ। धीरे धीरे समय के साथ हम लोगों का प्यार गहरा होता चला गया। वो मुझसे जब भी मिलती तो पूछती कि मुझे कभी छोड़ोगे तो नही और मैं उससे हमेशा एक ही बात बोलता कि तुम मुझे छोड़ जाओगी, मैं नही।

और फिर एक दिन ऐसा ही हुआ।
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उसकी शादी दूसरी जगह तय हो गयी। उसके बाद एक दिन मैं उससे मिला तो उसकी आंखों में मेरे लिए पहले जैसा प्यार नही दिखा। मैंने उसे आजमाने के लिए उससे बोला कि चलो हम लोग भागकर शादी कर लेते है। तब वह बोली कि, नहीं मैं नहीं भाग सकती, मैं किसी दूसरे की होने जा रही हूं।

तब मैंने बोला कि मेरे साथ वो किये हुए सब वादे झूठे थे, वो प्यार झूठा था। कहां गई वो कसमें जो तुम खाकर बोलती थी कि मैं तुम्हे कभी नही छोडूंगी। तो वो बोली कि शादी हो जाने से क्या हुआ, मैं तुमसे उसके बाद भी प्यार करुंगी और बात भी।
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वो दिन आखिर आ ही गया जब वो मेरे सामने दूसरे की हो रही थी और मैं एकांत मैं बहुत रो रहा था तब मेरा दोस्त मुझे समझाने लगा। जिस दिन उसकी शादी हुई वो दिन एक ऐसे भयानक सपने की तरह है, जो याद आने पर दिल झकझोर देता है। 27 मई 2015, ये वो दिन है जो मेरी जिंदगी का सबसे बुरा दिन है।

उसके जाने क बाद मैं पागलों जैसा हो गया, न खाने का सुध, न सोने की। मेरे दाढ़ी और बाल बड़े बड़े हो गए थे।
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तब मेरे दोस्त ने मुझसे कहा कि अगर तू पहले जैसा नहीं रहेगा तो मैं भी तुझे छोड़ कर चला जाऊंगा। मैं उसको गले लगाकर रोने लगा तो वो बोला, तू चिंता मत कर, मैं तुझे छोड़ कर कभी नही जाऊंगा।

आखिर दोस्त दोस्त होता है। आज तक मैं हेमा के इंतजार में हूं कि वो कभी तो मेरे से बात करेगी तो मैं उससे बोलूंगा कि तुमसे अच्छा तो मेरा दोस्त है जो समय पे मेरे साथ था। इसलिए दोस्तों दोस्त का साथ कभी मत छोड़ना।

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