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झांसी से राहुल की लव स्टोरी – love story of rahul from jhansi

अलग-अलग कास्ट होने की वजह से हम एक दूसरे के नहीं हो पाए। अब जात देखकर कौन प्यार करता है? खैर, मैं जानता हूं, वो जानती है और खुदा जानता है कि हमारा प्यार कितना सच्चा है।

हेलो, मेरा नाम राहुल है और मैं झांसी का रहनेवाला हूं। मेरे प्यार की कहानी 2014 से शुरू होती है। तब मैं सरकारी जॉब के लिए तैयारी कर रहा था। उस समय मैंने और दो दोस्तों ने ग्रुप स्टडी करने के लिए ग्रुप बनाया। हम तीन लोग थे ग्रुप में। मैं, मेरे बचपन का दोस्त अंकित और नम्रता।
झांसी से राहुल की लव स्टोरी
हमारे ग्रुप में एक और मेंबर जुड़ी, उसका नाम रूही था। एक दिन रूही के साथ उसकी एक फ्रेंड आई। उसका नाम था रीत। रीत को देखकर मुझे कुछ फील सा हुआ। उसका नाम मुझे बहुत अच्छा लगा। 2014 में यह हमारी पहली मुलाकात थी।
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बातों के दौरान पता चला कि रीत के बचपन में उसके पापा गुजर गए थे और उसकी मां को उनकी जगह सर्विस मिली थी। रीत नेपाल की थी लेकिन अब वह भारतीय नागरिक थी और झांसी में ही मां के साथ रहती थी। 2015 में न्यू ईयर सेलीब्रेट करने के लिए हम सब इकट्ठा हुए तो रूही के साथ रीत भी आई।

रूही के जरिए रीत को मेरी फीलिंग्स के बारे में पता चला। इसके बाद फेसबुक पर हम दोनों फ्रेंड बने और कब प्यार हुआ, पता ही न चला। हम दोनों ने एक-दूसरे का नंबर लिया। एसएमएस और चैट के जरिए बातें होने लगीं।
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2015 के जून में मेरी जॉब ग्रुप डी में लग गई थी। मैं उत्तर प्रदेश के बांदा में शिफ्टा हो गया। हर महीने हमलोग सिर्फ एक बार मिलते थे। हम दोनों एक दूसरे को इतना समझने कि बिना बताए एक दूसरे के मन की बात समझ लेते और हम दोनों में कभी झगड़ा नहीं हुआ।

लव लाइफ परफेक्ट चल रही थी। हमारे रिलेशनशिप में एक बड़ी दिक्कत यह थी कि मैं एससी कैटेगरी से था और रीत ऊंची जाति की थी। लेकिन हम दोनों में इसको लेकर कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। हमारे दोस्तों और सबने सपोर्ट किया।
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अगस्त 2015 में मेरी नई सरकारी जॉब झांसी में लग गई और होमटाउन में अब दोनों एक दूसरे का साथ पाकर बहुत खुश थे। हम ज्यादा मिल पाते थे। नवंबर 2015 में मैंने मम्मी पापा को रीत के बारे में बताया तो वे नाराज हो गए। कहने लगे कि समाज क्या सोचेगा। वे समझाने लगे लेकिन मैं अड़ गया तो मम्मी पापा ने मुझसे बात करना बंद कर दिया।

मेरे और रीत के बीच इस बारे में बात हुई और हम दोनों ने तय किया कि फैमिली को राजी करके ही हम कुछ करेंगे। रीत के भैया विदेश में जॉब करते थे। रीत ने कहा कि 2016 में वे घर आएंगे तो वह शादी की बात करेगी।

हम दोनों भैया का इंतजार करने लगे और प्यार गहरा होता गया। मैंने भी मां – बाप को कह दिया कि उनकी मर्जी से ही कुछ करूंगा जिसके बाद वे मुझसे बात करने लगे। सबकुछ पहले जैसा हो गया।
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2016 में वो वक्त आ गया जब रीत के भैया आए। अक्टूबर 2016 की बात है। रीत की भाभी नेपाल की थी। रीत की बड़ी दीदी और अन्य रिश्तेदार नेपाल में रहते थे। भैया आए तो पूरे परिवार ने नेपाल जाने का प्लान बनाया। रीत की नेपाल वाली दीदी को हम दोनों के प्यार के बारे में मालूम था। वो हम दोनों को सपोर्ट भी करती थी।

रीत भैया-भाभी के साथ नेपाल चली गई और हमें उम्मीद थी कि दिसंबर में वो वापस आएंगे तो हम शादी की बात आगे बढ़ाएंगे। नेपाल में ही रीत बातों-बातों में हम दोनों के प्यार के बारे में परिवार को बता देगी।
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रीत मेरी तस्वीर लेकर नेपाल गई थी। 6 नंवबर को मेरा जन्मदिन था और मैं बाजार में खरीदारी कर रहा था तभी रीत का नेपाल से मैसेज आया। उसने लिखा था कि शादी की बात बताने पर भैया और घरवालों ने मना कर दिया, वे कह रहे हैं लड़का लोअर कास्ट का है इसलिए शादी नहीं करेंगे। रीत वहां बहुत रोती रहती थी। उसका फेसबुक अकाउंट उसके भैया ने बंद करवा दिया। रीत से मेरी बात नहीं हो पाती थी।
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रीत ने सोचा कि वह नेपाल से झांसी लौटकर मां को शादी के लिए मनाएगी लेकिन भैया ने उसको इमोशनल ब्लैकमेल किया। भैया ने उसको कहा कि मां को हार्ट प्रॉब्लम है और डॉक्टर ने कुछ भी ऐसा कहने से मना किया है जिससे उनको सदमा लगे। रीत डर गई।

9 नवंबर को रीत का आखिरी बार फोन आया और उसने कहा कि बाबू मैं हार गई, कोई नहीं माना और न ही मम्मी को बताने दिया।
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उसकी दीदी ने उसका उतना सपोर्ट नहीं किया क्योंकि उसका भाई गुस्से में था। रीत ने कहा कि वह नेपाल से अब कभी इंडिया वापस नहीं आ सकेगी क्योंकि भैया अब उसे वहीं छोड़कर वापस जा रहे हैं। रीत इंडिया में रहना चाहती थी लेकिन ऐसा हो न सका। हम दोनों के बीच बातें बंद हो गईं। मैं उसको फेसबुक पर खोजता रहता था।

19 दिसंबर 2016 को रीत के एक रिश्तेदार के एफबी पेज पर मुझे उसकी शादी की दो तस्वीरें दिखीं। मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। पता चला कि रीत की शादी 12 दिसंबर को कर दी गई थी।

घरवालों ने जल्दी में उसकी शादी कर दी। मैं उस रात बहुत रोया। मुझे बस एक चीज का मलाल है कि एक बार भी मुझे अपनी बात रखने का चांस तो मिलना चाहिए था। एक फेयर चांस। अब जब उसकी शादी हो गई है तो बस मैं उसके लिए प्रे करता हूं कि वो खुश रहे। हम दोनों का ब्रेकअप नहीं हुआ।

तीन साल की रिलेशनशिप में न ही झगड़ा हुआ। एक दूसरे के लिए हम परफेक्ट थे..लेकिन एक दूसरे की किस्मत में नहीं थे। अब जब वो खुश रहेगी तो मैं भी खुश रहूंगा। मेरी नजर में रीत की इज्जत और बढ़ गई है। उस लड़की ने मां और परिवार के कर्ज को प्यार कुर्बान करके उतारा।
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सोचता हूं कि अगर एक बार उससे बात हो जाती तो उससे कहता कि जो हुआ उसमें उसकी कोई गलती नहीं है। उसने तो पूरा एफर्ट लगाया था। उसके भैया ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। रीत को झांसी में उसके फ्रेंड्स तक से बात नहीं करने दिया। मैंने ही सबको बताया कि रीत की शादी तो हो गई। वो सब शॉक्ड रह गए।

रूही तो उसकी बहन जैसी थी लेकिन उससे भी वह बात नहीं कर पाई। रीत के ससुरालवालों के फेसबुक प्रोफाइल से पता चला कि उसकी शादी पढ़ी-लिखी फैमिली में हुई है तो यह सोचकर थोड़ा मन हल्का होता है कि शायद उसका वो लोग ख्याल रखेंगे। सोचता हूं, एक बार उससे बात हो तो मैं कहूंगा कि उसके लिए हमेशा मेरे दिल में बेस्ट विशेज रहेंगी।
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अलग-अलग कास्ट होने की वजह से हम एक दूसरे के नहीं हो पाए। अब जात देखकर कौन प्यार करता है? खैर, मैं जानता हूं, वो जानती है और खुदा जानता है कि हमारा प्यार कितना सच्चा है। रीत की मम्मी जो झांसी में रहती है, उसको हम दोनों के प्यार के बारे में कभी पता नहीं चला। मैंने रीत के लिए कुछ लाइन्स लिखी हैं। 19 तारीख को यह कहानी मेरे लिए पोस्ट करना।

क्या हुआ जो नहीं अब हम तुम्हारे हैं
क्या हुआ जो इश्क़ में हम दोनों हारे हैं
मोहब्बत के वो खूबसूरत पल सदा तुम्हारे और हमारे हैं
बस कसक है कि इश्क में तुम्हें जीत कर इस जमाने से हारे हैं
REET#Best_wishes_for_your_married_life

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