उत्तर प्रदेश से सोना की लव स्टोरी – sona love story from UP

मेरी और वैभव की लव स्टोरी एक फोन कॉल से शुरू हुई थी जो मेरे लिए तो एक रॉन्ग नंबर ही थी पर फोन करनेवाले ने शायद ये जानबूझकर किया था। तब मैं 10वीं में पढ़ती थी। वो बी कॉम में पढ़ रहा था। वो मुझे रोज फोन पे परेशान करने लगा। मैं ज्यादा ध्यान नहीं देती थी इन सब बातों पर।

sona love story

लेकिन उसने बहुत फोन किया। मैं परेशान रहने लगी। ना किसी को बता पाई। धीरे-धीरे पता नहीं क्या हुआ, मैं उससे बात करने लगी। लेकिन चार महीने बाद मुझे पता चला कि वो मेरे ही रिलेशन के थे और मेरे मम्मी पापा उसको पहले से जानते थे। उसकी सब तारीफ करते थे।
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मुझे दुख हुआ यह जानकर कि उसने झूठ बोलकर मुझसे बात की और खुशी ये सोचकर हुई कि वह सच में बहुत अच्छा इंसान है। उस रात हम दोनों फोन पे पूरी रात रोए थे और उसने रोते हुए कहा था कि जो सजा देनी है, दे दो।

लेकिन मुझे भी उससे सच में प्यार हो गया। मैंने डिसाइड किया था कि मैं कभी उससे बात नहीं करुंगी लेकिन मैं बहुत प्यार करने लगी थी। मैं हमेशा लड़कों से कम बोलनेवाली लड़की थी। मैं यह सोचती थी कि मेरी लाइफ में कभी कोई ऐसा लड़का आए तो वह पहला और आखिरी हो।
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मैं अपनेआप को रोक नहीं पाई, मैंने उसको माफ कर दिया और बात करनी शुरू कर दी। लेकिन हमेशा एक डर सताता रहता था कि पता नहीं हमारा प्यार कहीं अधूरा ही न रह जाए। मैं उस वक्त 12वीं में थी।

उसके घरवालों ने मेरे लिए रिश्ते की बात कही तो मेरे मम्मी-पापा ने मना कर दिया क्योंकि जहां हम दोनों थे, वहां हमारे घरवालों के बीच रिश्ते थे। उसके परिवार से मेरी मम्मी की कभी बनती नहीं थी। लेकिन मुझे लगता था कि मैं उन्हें मना लूंगी। धीरे-धीरे टाइम निकल गया। मेरी ग्रेजुएशन कंप्लीट होनेवाली थी।
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घरवालों ने मेरे लिए रिश्ते खोजने शुरू कर दिए जबकि मैं उनको वैभव के बारे में बोल चुकी थी। इसी बीच एक दिन बहुत ड्रामा हो गया। वैभव के घरवाले भी उसकी शादी को लेकर जिद करने लगे।

मैंने और वैभव, दोनों ने अपने पैरेंट्स को मना कर दिया कि हम कहीं और शादी नहीं करेंगे। उसके घरवाले तो पहले से ही तैयार थे पर मेरी मम्मी नहीं मानीं। मम्मी ने मुझे बोल दिया कि अगर तेरी शादी वहां हुई तो मैं सुसाइड कर लूंगी।
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मैंने सबके बहुत हाथ-पैर जोड़े। लेकिन कोई नहीं माना। मैंने वैभव को बोल दिया कि शादी कर लो, मेरी वजह से अपनी शादी के लिए मना मत करो। उसका रिश्ता 2016 के मार्च में पक्का हो गया।

हम दोनों की हालत बहुत बुरी हो गई थी। ना खाना, ना सोना, बस ऐसा लगता था जैसे हम दोनों मर जाएंगे। नवंबर में उसकी शादी होनी थी। लेकिन फिर हम दोनों ने एक दूसरे को बहुत संभालने की कोशिश की।
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मैं भी नहीं चाहती थी कि मेरी वजह से उसके पैरेंट्स से उनका अकेला बेटा दूर हो जाए क्योंकि इन सबमें वैभव के मां-बाप की कोई गलती नहीं थी। इसी बीच जुलाई में मेरा भी रिश्ता पक्का हो गया। लेकिन चार पांच दिन बाद उस लड़के ने शादी करने से मना कर दिया।

सबको बहुत दुख हुआ क्योंकि रिंग सेरेमनी भी हो गई थी। उसके बाद कई लड़कों ने मुझे रिजेक्ट किया। ऐसा नहीं था कि मैं बहुत बुरी दिखती हूं लेकिन पता नहीं भगवान भी शायद ये दिखाना चाहते थे मेरे मां-बाप को कि दुनिया कितनी बुरी है जिसकी डिमांड कभी पूरी ही नहीं होती।

कोई कहता था कि बड़ी गाड़ी चाहिए, कोई कैश और कोई कुछ। उसके बाद शायद इनके मन में वैभव के बारे में कुछ आया भी लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था।
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नवंबर में वैभव की शादी हो गई। जितनी बातें पहले करते थे, उतनी तो नहीं होती लेकिन अब भी बात हो जाती है हमारी। मैंने बहुत कोशिश की कि बात करना छोड़ दूं पर वो मुझे हमेशा यही कहते कि प्लीज, बात करना मत छोड़ना कभी भी, तुम जो कहोगी कर लूंगा पर बात करना मत छोड़ना।

ऐसा ही मेरे भी साथ हुआ। मैं तड़प जाती हूं बात किए बिना। वो बहुत अच्छा इंसान है। छह सालों के प्यार में उसने मुझे कभी मिलने के लिए फोर्स नहीं किया। कई बार मेरे स्कूल या कॉलेज के सामने आ जाता था और मुझे देखकर चला जाता था हमेशा।

हम दोनों के बीच में एक दूसरे के लिए बहुच सच्चाई, बहुत प्यार और बहुत ईमानदारी थी लेकिन हम मिल नहीं पाए। बहुत दुख होता है। अब भी मैं कभी रोने लगती हूं तो वो मुझे समझाते हुए यही कहता है कि लाइफ बहुत बड़ी है। अभी इसमें पता नहीं क्या-क्या देखना है, अगर हमें मिलना ही हुआ तो हम कभी ना कभी मिल जाएंगे।

पर मुझे ये पता है कि ऐसा कुछ नहीं होता। मैं कभी उन दोनों के बीच में नहीं आऊंगी और कभी ऐसा कोई गलत काम नहीं करुंगी जिससे उन दोनों के बीच में कोई प्रॉब्लम हो। हम दोनों कभी अपने पार्टनर से कभी भी इतना प्यार नहीं कर पाएंगे, ये भी सच है। मेरा मन करता है कि कभी शादी ना करूं किसी से।
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मेरे पैरेंट्स कभी वैभव जैसा लड़का और वैसा घर नहीं खोज पाएंगे मेरे लिए। लेकिन बस मैंने इनकी जिद पूरी कर दी। लोग हमेशा यही कहते हैं कि मां बाप कभी गलत नहीं होते लेकिन एक बात मैं कहना चाहूंगी कि हमेशा बच्चे भी गलत नहीं होते।

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