इलाहाबाद से सोनू की लव स्टोरी – love story of sonu from allahabad

यह मेरी और मोनिका की प्रेम कहानी है। मेरी बड़ी दीदी जिस स्कूल में पढ़ाती थी उसी स्कूल में रीना श्रीवास्तव नाम की एक और टीचर भी पढ़ाती थी, उनकी बेटी का नाम मोनिका था। मोनिका से मेरी पहली मुलाकात 14 नवंबर को हुई थी। दीदी के स्कूल में प्रत्येक 14 नवंबर को बाल दिवस के अवसर पर मेला लगता था। उस वक्त मैं भी बहुत बड़ा नहीं था, सो दीदी 14 नवंबर को मुझे भी अपने स्कूल लेकर चली गई। दीदी, स्कूल से पहले रीना जी को साथ लेने उनके घर गईं। मैं उनके साथ था।

सोनू लव स्टोरी
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रीना जी के यहां चाय-पानी के बाद उन्होंने दीदी से कहा कि सोनू, स्कूल जाकर क्या करेगा, हम तुम चलते हैं। इस पर दीदी ने कहा कि सोनू, फिर अकेले यहां क्या करेगा.. इस पर रीना जी ने कहा कि इसे यहीं रहने दो, कुछ देर में मोनिका स्कूल से आ जायेगी तो सोनू उसी के साथ रहेगा।

रीना जी और दीदी चली गईं, मैं उनके घर में अकेला था। थोड़ी ही देर में डोर बेल की आवाज सुनाई दी। मैंने अंदर से पूछा, कौन तो दरवाजे से बड़ी तेज आवाज आती है… खोलो यार मम्मी…. मैं हूं मोनिका।

मैंने जैसे ही दरवाजा खोला…मोनिका मुझे और मैं मोनिका को देखता रह गया।
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कुछ समय के लिए हम दोनों कुछ समझ नहीं पाए। मोनिका ने घर के फोन से दीदी के स्कूल फोन लगाया और अपनी मम्मी से मेरे बारे में पूछा। रीना जी ने उससे कहा कि सोनू का ख्याल रखना। फिर मोनिका ने धीरे से मुझसे पूछा, आप भी खाना खायेंगे..तो मोनिका और मैंने उस दिन एक टेबल पर खाना खाया। अब मुझे यह ना समझ में आये कि मैं बातें कौन सी करूं.. उधर मोनिका के मन मे भी कुछ ना कुछ चल रहा था।

इसी बीच मोनिका को ट्यूशन के लिए जाना पड़ा और वह मुझे कहते हुए गई कि तुम तब तक मत जाना जब तक मैं ना आ जाऊं। मैंने भी जल्दबाजी में मोनिका से हां कर दी। उसके बाद मैं बैठा मोनिका का इंतज़ार करता रहा। थोड़ी ही देर में मोनिका ट्यूशन से वापस आ गई। पहले दिन की ही बातचीत में पता नहीं क्यों मुझे लगने लगा कि मेरे जीवन में कुछ ना कुछ तो होने वाला है।
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मोनिका के आते ही मैने झट से पूछा कि तुम इतनी जल्दी ट्यूशन से कैसे आ गई तो उसने कहा कि बस मैडम ने कहा कि मेरी तबियत ठीक नहीं है तो मैं तुरंत वहां से चली आई..एक बात और तुम भी तो मेरा इंतज़ार कर रहे थे। उसके बाद मेरे और मोनिका के बीच बातों का दौर बढ़ता चला गया, फिर शाम में मैं और मोनिका बाल मेले में घूमने गए। वहां पर भी मोनिका बस मेरे साथ ही घूमती रही।

उसके बाद वो हर बुधवार को मेरे घर अपनी मम्मी के साथ आने लगी और हम सुबह से शाम तक उसी के साथ बातें करने मे व्यस्त रहने लगे और हर रविवार को मैं मोनिका यहां जाने लगा। यह दौर कब प्यार में तब्दील हो गया इसका मुझे और मोनिका को पता ही नहीं चला।

हमारे और मोनिका के बीच बढ़ती निकटता के बारे में मेरे और उसके घर के लोग जानने लगे थे, एक दिन मेरी मां ने मोनिका की मम्मी से कह दिया कि सोनू की शादी मैं मोनिका से ही करुंगी आप इसके लिए वर की तलाश नहीं करेंगी, मोनिका अब इस घर की बहू बन गई है।
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हमने और मोनिका ने भी तय कर लिया कि अब हम जीवन भर साथ रहेंगे। हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन चुके थे। हम दोनों पूरी तरह आश्वस्त हो चुके थे, लेकिन प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था..जिसकी हम दोनों ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। जो अब मैं बताने जा रहा हूं वो सुनकर आपके भी होश उड़ जायेंगे..।
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एक दिन मोनिका कॉलेज से लौट रही थी, जैसे ही उसकी बस यमुना ब्रिज पर पहुंची वैसे ही मोनिका बस से कूदने का प्रयास करने लगी, उसकी इस हरकत पर पहले तो बस के कंडक्टर ने अनदेखी कर दी लेकिन जब मोनिका फिर से उसी तरह रिएक्ट करने लगी, तब बस में बैठे सभी छात्र और छात्राओं ने बस के ड्राइवर का ध्यान मोनिका की तरफ देने को कहा। तब तक मोनिका और भयंकर रूप से बस में बैठे लोगों पर हमलावर हो चुकी थी।

किसी तरह कंडक्टर और बस के ड्राइवर ने मोनिका को कंट्रोल करते हुए उसके घर तक पहुंचाया। जैसे ही वह घर पहुंची और हमलावर हो गई.. तबतक पूरे कॉलोनी के लोग इकट्ठा हो गए और डॉक्टर को भी बुला लिया गया।

डॉक्टर ने देखते ही मोनिका के पिता जी से पूछा कि क्या कभी इसे कुत्ते ने काटा था, तो उसकी मम्मी ने कहा कि हां बचपन में रेल से यात्रा के दौरान एक स्टेशन पर एक कुत्ते ने इसे काट लिया था, लेकिन खून नहीं निकलने के कारण हम लोगों ने इसे डॉक्टर के पास नहीं ले गए।

इसी बीच मेरी दीदी का फोन घर पर आया और हमें यह सूचना मिली कि मोनिका के साथ ऐसा हादसा हुआ है, यह सुनते ही मेरी मानसिक स्थिति एकदम से बिगड़ गई, मै आननफानन में मोनिका के यहां पहुंच गया लेकिन मेरी मोनिका मुझे पहचान नहीं पाई।

..मैं उसके पास गया लेकिन मोनिका मेरे ऊपर भी एकदम से खूंखार तरीके से झपटी, वहां पर खड़े सभी लोग मेरी ओर आए और मुझे समझाया कि मोनिका का दिमागी संतुलन बिगड़ चुका है, और चौबीस घंटे भी इसके लिए बहुत भारी पड़ने वाले हैं।
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मेरी आंखों के सामने मेरी मोनिका कुत्तों की तरह रिएक्ट कर रही थी..उसके पूरे शरीर को भयंकर तरीके से बांध दिया गया था..मैं पागलों की तरह खड़ा अपने सांसों को टूटते देख रहा था आखिर चार घंटे बाद मोनिका हमें अकेले छोड़कर चली गई।

..मैं सदमे में खड़ा अपने साथ हो रहे किस्मत के इस भयानक खेल को देखता रहा और मेरे जीवन को एनर्जी देने वाली मेरी जीवन संगिनी प्यार के पहली मंजिल में ही मेरा साथ छोड़कर पता नहीं कहां चली गई।

मैं आज भी उस जैसी संगिनी की तलाश में भटकता रहता हूं पर मेरी मोनिका जैसी मुझे दूसरा कोई ना मिला..उसके साथ बिताए एक-एक क्षण मुझे आज भी बहुत याद आते हैं और मेरी आंखों से आंसुओं की धारा रूकने का नाम नहीं लेती हैं.. काश मोनिका..कुछ देर तुम मेरे साथ और होती।

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