love story

बनारस से साहिल की लव स्टोरी – Sahil love story from Varanasi

प्लीज फ्रेंड, आप ही बताओ कि उसने क्यों मुझे इस तरह तनहा मरने के लिए छोड़ दिया। मैं आगे क्या करूं? पहली रेशमा ने जो जख्म दिए मैं तो उसको भूलने की कोशिश कर ही रहा था कि अचानक दूसरी रेशमा ने आकर फिर से मुझे और गहरा जख्म दे दिया।

मेरा नाम साहिल है और मैं यूपी के बनारस का रहने वाला हूं। मैं रेशमा से बहुत प्यार करता था। वो भी मुझसे बेइंतहा मोहब्बत करती थी। हम दोनों की ज़िन्दगी बहुत अच्छी चल रही थी। हम दोनों बहुत खुश थे। फिर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। रेशमा का एक दिन कॉल आया कि मेरी शादी के लिए घर वाले लड़के देख रहे हैं।

sahil love story
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मैं बहुत परेशान हो गया। मेरी पढ़ाई उस वक़्त चल रही थी इसलिए मैं उससे बोला कि दो साल रुक जाओ। मैं तुम से शादी कर लूंगा लेकिन उसके घर वाले नहीं माने और उसकी शादी कहीं और कर दी। मैं उसके बिना बिलकुल अधूरा सा रहने लगा, पढ़ाई में भी मन नहीं लगता। किसी काम में भी दिल बिलकुल नहीं लगता, मैं हमेशा अकेला रहने लगा था।
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रेशमा के जाने के बाद मुझे उसके गम में नशे की लत लग गयी। मैं उसको भुलाने के लिए शराब और सिगरेट का सहारा लेने लगा। कुछ रोज बाद जब ये बात रेशमा को पता चली तो उसने मुझे फोन किया और मिलने को बुलाया। मेरा मन तो नहीं कर रहा था कि उसके सामने भी जाऊ लेकिन दिल नहीं माना। मैं गया, उससे मिला तो मैं सिर्फ उसे देखे जा रहा था।
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वो बोली कि अब मुझे भूल जाओ, अब मैं किसी और की अमानत हूं।। मेरी आँखों में आंसू आ गए। मैं फिर भी मुस्कुराते हुए बोला कि मैं तुमको बिलकुल भूल गया हूं। फिर वो बोली, साहिल तुम्हें तो ठीक से झूठ भी नहीं बोलना आता, मुझे भूल गए हो तो तुम्हारी आँखें लाल क्यों हैं। मैं बोला कि मेरी आँखों में कुछ चला गया है।
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फिर वो बोली कि मैंने सुना है कि तुम अब बिलकुल अकेले रहते हो और शराब सिगरेट जैसा नशा करते हो, मुझे पता है कि ये सब तुम मुझे भुलाने के लिए कर रहे हो। मैं बोला कि ऐसा कुछ नहीं है। इतना मैं कह ही रहा था कि उसने मेरे हाथ को अपने सर पर रखकर बोली कि वादा करो कि आज के बाद कभी शराब और सिगरेट को हाथ नहीं लगाओगे और मुझे भूलकर हमेशा खुश रहोगे और तुम किसी दूसरी लड़की से प्यार करोगे, मुझे भूल जाओगे और उसको मुझसे भी ज्यादा प्यार दोगे।
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मैं बोला कि मैं तुम्हारे बाद किसी लड़की से प्यार नहीं करूँगा तो वो बोली कि नहीं, तुम ऐसा नहीं करोगे, किसी एक के चले जाने से ज़िन्दगी ख़त्म नहीं हो जाती, देखना तुम्हें एक दिन मुझसे भी ज्यादा प्यार करने वाली मिलेगी। इतना कह कर हम दोनों वापस रोते हुए अपने घर वापस आ गए।
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फिर धीरे धीरे उसकी यादें को भूलने की कोशिश करते करते पढ़ाई ख़त्म हो गयी, दो साल बीत गए, मैं जॉब की तलाश में दिल्ली आ गया। मैं बिल्कुल अकेला ही रहता, किसी से ज्यादा क्लोज़ नहीं होता। मेरे ऑफिस में हमारे जॉब पर एक लड़की थी जिसका नाम रेशमा ही था लेकिन मैंने कभी उस पर और न ही उसके नाम पर ध्यान दिया।
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फिर उसने मेरे फ्रेंड से मेरे बारे में पता लगाया की ये कौन है और सबसे अलग क्यों रहता है। वो मेरे बारे में सब पता कर के एक रोज जब मेरी और उसकी दोनों की नाईट शिफ्ट थी तो वो मेरे पास आई और मेरे से बात करने लगी। लेकिन मैं उसको इग्नोर कर जाता। फिर एक रोज़ उसने मुझे प्रपोज़ किया तो मैं उसे मना कर दिया और बोला कि मुझे प्यार में विश्वास नहीं है, मैं किसी से प्यार नहीं करूँगा। हम सिर्फ एक अच्छे दोस्त बन सकते है, वो मायूस हो कर वहां से चली गयी। मैं भी अपने काम में व्यस्त हो गया।
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फिर उसने मेरे बारे में मेरे दोस्तों से पता लगाया कि क्यों मैं किसी से प्यार नहीं करना चाहता फिर वो बोली कि सारी लडकियां एक जैसी नहीं होती, तुम मेरा ट्रस्ट करो, मैं तुम्हें कभी भी धोखा नहीं दूंगी। मैं कुछ नहीं बोला दिन बीतते गए। वो हमेशा कहती और मेरे दोस्त भी कहते कि एक बार हमारी बात मान ले साहिल।
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मेरे भी दिल में उसके लिए प्यार जागने लगा, मुझे लगा कि शायद उस रेशमा की अधूरी मोहब्बत को पूरा करने के लिए खुदा ने इस रेशमा को भेजा है, मैं मान गया। हम दोनों खुश थे, फिर अचानक न जाने क्या हुआ कि उसने मुझसे बात करना, मेरा फोन उठाना सब कुछ बंद कर दिया। मैंने बहुत कोशिश की कि उससे पुछूं कि आखिर मेरी गलती क्या है, जो तुमने मुझे यूं तनहा कर दिया, मुझे फिर से अंधेरों में धकेल दिया।
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मैंने उससे एक बार बात करने की कोशिश भी की लेकिन उसने कहा कि मेरे पास टाइम नहीं है तुमसे बात करने का। मैं उस रोज़ बहुत रोया और अब तो वो मुझसे रोज मिलती है लेकिन बिल्कुन अंजानो की तरह। मुझे समझ नहीं आता कि क्यों मेरे साथ ही ऐसा होता है। हर कोई बस वक़्त गुजारने के लिए अपना बनाता है फिर छोड़ देता है। लेकिन मुझे सिर्फ इस रेशमा से इतना ही पूछना है कि क्या खता है मेरी जो इतनी बेरुखी दिखाई तुमने।
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प्लीज फ्रेंड, आप ही बताओ कि उसने क्यों मुझे इस तरह तनहा मरने के लिए छोड़ दिया। मैं आगे क्या करूं? पहली रेशमा ने जो जख्म दिए मैं तो उसको भूलने की कोशिश कर ही रहा था कि अचानक दूसरी रेशमा ने आकर फिर से मुझे और गहरा जख्म दे दिया।

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