पश्चिम बंगाल से रेहान की लव स्टोरी- love story of rehan from west bengal

कहते हैं कि प्यार जिंदगी का सबसे खूबसूरत अहसास होता है और मुझे इसका अहसास उससे मिलकर हुआ। साथ ही यह भी पता चला कि जिंदगी में प्यार का मिलना कितना जरूरी है। जब प्यार न मिले तो इस जिंदगी में दर्द और तड़प के सिवा नहीं बचता। शायद मेरी जिंदगी भी इसी मोड़ पर आकर ठहर गई है।

रेहान की लव स्टोरी
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वैसे तो वक्त बड़े से बड़ा दर्द की दवा बन जाता है पर मुझे नहीं लगता कि मेरे साथ कभी ऐसा होगा क्योंकि दिल की जिस गहराई के साथ मैंने उसे चाहा है, वहां तक वक्त भी कभी पहुंच ही नहीं सकता। वहां का दर्द उस लड़की के सिवा और कोई नहीं मिटा सकता।
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उससे मिलने के बाद ऐसा लगने लगा था कि जैसे मैं हवाओं में उड़ने लगा हूं। दिल में एक बेचैनी सी रहती थी। वैसे तो बेचैनी अब भी है। तब की बेचैनी में एक प्यारा सा अहसास था और अब जो बेचैनी है उसमें दर्द और तड़प की चुभन है। हर लम्हा काटने को दौड़ता है। हर जगह बस वो ही नजर आती है। वो मेरी जिंदगी में आई और हलचल मचा कर चली गई।
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देखो ना, मैं तुम्हारे बिना कैसा हो गया हूं। एक दम से खाली खाली लगती है जिंदगी। कितना तन्हा। आज एक साल के बाद कितनी बदल गई है दुनिया और शायद तुम भी। पर मैं आज भी वहीं खड़ा हूं जहां तुम मुझे छोड़ के गई थी। उसी मोड़ पर तुम्हारे लौट आने के इंतजार में।
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पहले भी कितनी बार गई थी तुम पर लौट आती थी। अब इतनी दूर चली गई हो कि जहां से लौट नहींं सकती। देखो ना मैं वहीं पर खड़ा रोता बिलखता हूं, हो सके तो लौट आओ और मुझे संभालो। मैं टूट चुका हूं, हार चुका हूं।
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वो मेरे बचपन का प्यार थी। मैं 14 का था और वो 12 की। हम दोनों पड़ोसी थे। मगर वो लोग किसी दूसरी सिटी में रहते थे। बस छुट्टी पर ही घर आते थे। मैंने उसे पहली बार 21 अक्टूबर 2005 को देखा था। बारिश में भीगी भीगी सी वो अपने घर आ रही थी। उसको देखने के बाद ऐसा नहीं लगा था कि वो कभी मेरी जिंदगी बनेगी।
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पहले हम दोनों में बातें शुरू हुईं। फिर न जाने कब प्यार हो गया। हम लोग साथ में खूब मस्ती करते और जब वो छुट्टी खत्म करके वापस दूसरी सिटी जाने लगती तो मैं खूब रोता था। वह मुझे चुप कराती थी और कहती थी कि मैं फिर वापस आ जाऊंगी।
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देखते देखते हम दोनों पता नहीं कब बड़े हो गए। हम दोनों की फोन पर बात होती थी। उस समय एसटीडी बूथ हुआ करता था। जब मोबाइल आया तो फिर मैसेज से चैट करने लगे। फिर फेसबुक, ह्वाट्सऐप आया। मैं उससे बेपनाह प्यार करता था और शायद वो भी मुझसे उतना ही करती थी।
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हम दोनों की लड़ाई होती थी लेकिन इस बात पर कि कौन किसको ज्यादा प्यार करता है। इस बात को लेकर मैं पूछता था कि कभी मुझे छोड़ोगी तो नहीं तो वो कहती थी कि पागल ऐसा मैं सोच भी नहीं सकती, कभी मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकती, मैं तुम्हें कभी नहीं छोड़ूंगी।
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हमारी लाइफ चल रही थी कि अचानक से एक तूफान आया। परिवार के लोग उसकी शादी करवाना चाहते थे और लड़के वाले देखने आ रहे थे। ये बात उसने मुझे बताई और बोली कि जल्दी कोई रास्ता निकालो वरना मैं मर जाऊंगी। मैंने उसे संभाला पर मैं उस खबर को सुनकर अंदर से टूट गया था।
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फिर मैंने अपनी मम्मी को रो रो कर सारी बात बताई तो मेरे घर से सब रेडी हो गए। अब उसकी बारी थी कि वो अपनी फैमिली को मनाए। जिस दिन लड़के वाले उसको देखने आए उसी दिन वो बहुत रोई। अपनी मम्मी को बोली कि मुझे कहीं और शादी नहीं करनी पर उसकी मम्मी नहीं मानीं। मैंने उससे कहा कि पापा से बात करो, वो जैसा फैसला करेंगे, मैं साथ हूं। वो बोली कि ठीक है, बात करूंगी।

पर अगला दिन उसका मैसेज आया, वो मैसेज मुझे आज भी याद है…उसमें लिखा था..अब हमारा कुछ नहीं हो सकता, भूल जाओ मुझे। हां, यही मैसेज था, मैंने फोन किया पर वो बदल चुकी थी। वो, वो नहीं रही थी जिसने मुझे बचपन से प्यार किया था। वो फोन पर मेरी गलती गिना रही थी। वो बोल रही थी कि मुझसे गलती हुई कि मैंने इतने सालों तक तुमसे प्यार किया। सॉरी, मुझे भूल जाओ, मुझसे गलती हो गई कि मैं इस रिश्ते को इतना आगे ले गई। पहले ही खत्म कर देना चाहिए था।
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मैं उसकी बातें सुनकर शॉक्ड था। जो एक दिन पहले मेरी थी, वो एक रात में इतना चेंज कैसे हो गई। मैंने पूछा बात क्या है, पापा से बात की कि नहीं..तो वो बोली कि नहीं बात की और बात करना भी नहीं चाहती। मैंने कहा कि मैं बात करता हूं तुम्हारे पापा से तो उसने मना करते हुए कसम दे दी।
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मैं उस दिन बहुत रोया, गिड़गिड़ाया..प्लीज मुझे छोड़कर मत जाओ, मैं नहीं रह सकता तुम्हारे बिना..प्लीज मुझे मत छोड़ो..मैं मर जाऊंगा तुम्हारे बिना जिंदगी का सोच भी नहीं सकता..मेरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी..मैं बहुत रोया पर वो एक न सुनी और बोली कि आज के बाद समझना कि मैं मर गई हूं, यही सोचकर जीना।
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इसके बाद उसने फोन रख दी और मेरा नंबर ब्लॉक कर दिया। ह्वाट्सऐप, फेसबुक सब ब्लॉक। उस दिन मैं पूरी तरह टूट चुका था। मैं मर जाना चाहता था लेकिन जब भी ऐसा सोचता, मेरी मां का चेहरा आंखों के सामने आ जाता, मैं सोचता कि मेरे बाद उनका क्या होगा।
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वक्त की धुंध ने सभी चेहरों को अजनबी सा कर दिया है पर उसका चेहरा आज भी उतना ही साफ है…कुछ कहानियों का अधूरापन ही उसका मुकद्दर होता है..मेरी कहानी भी खुदा ने अधूरी ही लिखी थी।

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