गुड़गांव से प्रीति की जिंदगी की कहानी – Life story of Preeti from gurgaon

मेरा नाम प्रीति है। मैं 21 साल की हूं। मैं अपनी फैमिली के साथ गुड़गांव में रहती हूं। हमारी फैमिली में मेरी बड़ी बहन है, बड़े भाई, मैं हूं, मां हैं और पापा बहुत पहले गुजर गए। उनके बाद भाई ने सबको संभाला। नगर निगम में वे सरकारी नौकरी करते थे।

preeti love story

कुछ समय बाद भैया को एक लड़की से प्यार हो गया। भैया ने उस लड़की से शादी की। भाभी प्रेग्नेंट थी और वो बच्चा नहीं चाहती थी। भैया हमारे शुरू से बच्चों को बहुत प्यार करते थे। भैया बोलते थे कि ये मेरा बच्चा है और वो इस दुनिया में आएगा लेकिन भाभी बोलती थी कि अभी नहीं आएगा।

उन  दोनों की रोज लड़ाई होती थी। एक दिन भैया ने आग लगा ली खुद को और उसके बाद जो हुआ मैं बता नहीं सकती। हमारे भैया जिस लड़की के बिना खाना नहीं खाते थे, उस लड़की की वजह से खुदकुशी की कोशिश की। उनको हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। वो दिन हमारे लिए बहुत बुरे थे।

मैं अपने घर में सबसे छोटी हूं और सब मुझे छोड़कर भैया के पास हॉस्पिटल में रहते थे। भैया को उनकी जरूरत थी। दीदी, मां और भाभी हॉस्पिटल में रहती थी। भाभी मेरी अच्छी नहीं थी। उनकी वजह से भाई ने आग लगाई थी। हॉस्पिटल में वो भाई के रूम में एप्पल खाती रहती थी जबकि भैया साथ खाने को कहते थे तो मना कर देती थी।

हम लोगों ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत नहीं की क्योंकि वो हमारे घर की इज्जत थी। भाभी हॉस्पिटल में भैया की केयर नहीं करती थी। भैया उनको बुलाते रहते थे –  मुझे टॉयलेट ले चलो। लेकिन वो सुनती ही नहीं थी। उन्होंने भैया को पागल साबित करने की कोशिश की और एक बार भैया के बारे में बोली कि मरते भी नहीं, मेरे पीछे पड़े रहते हैं। यह सुनकर मेरी दीदी ने उनको थप्पड़ मार दिया।

भाभी इसके बाद अपनी फैमिली लेकर आ गई। वहीं लड़ाई झगड़ा हुआ। उसके बाद एक महीने बाद भैया की डेथ हो गई। उनकी मौत के बाद उनको एक लड़का है। भैया ने बेटे का नाम पहले ही सोच रखा था और उनके कहे अनुसार ही बच्चे का नाम प्रेम रखा गया।

कुछ दिन बाद राखी थी तो हम लोग त्योहार नहीं मना रहे थे। लेकिन भाभी ने मां से कहा कि वो त्योहार मनाना चाहती है। मां ने कहा कि बेटा जैसा तेरा मन करे, तू कर। भाभी चली गई। भाभी प्रेम को हमारे पास छोड़कर चली गई।

एक सप्ताह बाद भाभी पंचायत लेकर घर आ गई और बोली कि जो भी सामान लाई थी वो दे दो। पंचायत में फैसला ये हुआ कि प्रेम हमारे पास रहेगा और भाभी अपना सारा सामान ले जाएगी। भाभी प्रेम को नहीं ले जाना चाहती थी क्योंकि उसे दूसरी शादी करनी थी। ये सब 2010 में हुआ।

उसके बाद भैया का केस कोर्ट में चल रहा है। आज सात साल होने के बाद भी केस चल रहा है। उस केस में भाभी संपत्ति में आधा हिस्सा मांग रही है जबकि वो दूसरी रशादी कर चुकी है। दूसरी शादी से उसका एक बेटा भी है। फिर भी वो हिस्सा मांग रही है।

भाभी को हमारी परेशानी नहीं दिख रही। अब हम सिर्फ चार हैं। मैं, मेरी बहन, मां और सात साल का प्रेम। कोई आदमी नहीं मेरे घर में। हर राखी पर हम रोते हैं भाई के लिए। हर त्योहार पर रोते हैं पापा और भाई के लिए। हम बिल्कुल अकेले पड़ गए। 7 दिन का प्रेम था जब भाभी उसे छोड़कर चली गई थी। अब वो सात साल का हो चुका है। बहुत दुखों को झेलकर पाला है उसको।

भाई ने जब शादी की थी तब ही घर की रजिस्ट्री गिरवी रख दी थी। उसके बाद गिरवी रखनेवाले ने उस घर को आगे किसी और के पास गिरवी रख दी। हमारे घर को खाली कराने के लिए वो आदमी आ गया, बोला पैसा दो वरना घर छोड़ दो। फिर दीदी ने जॉब किया। मुझे भी पढ़ाया। मेरी भी जॉब लगी।

कुछ साल बाद अपना ट्रेवलिंग का बिजनेस किया। आज मैं अपने बिजनेस से खुश हूं। मेरी फैमिली भी खुश है। दीदी अब घर रहती है और मम्मी भी। काम सिर्फ मैं करती हूं। ऑफिस भी घर के पास ही है। लेकिन भाई का केस खत्म नहीं हुआ। अगर कोई इस बारे में राय दे, इस पेज से कोई वकील  जुड़ा हो..वो सलाह दे तो बड़ी मेहरबानी होगी। हम क्या करें?

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