एक बात स्मिता ने ऐसी कही कि हमारा रिश्ता हो न सका – मुंबई से स्वरुप की लव स्टोरी

मैं स्वरुप हूं। मुंबई में रहता हूं। पढ़ाई, जॉब और करियर की तलाश के दिनों में कोई लड़की मुझे पसंद ही नहीं आई। किसी लड़की के साथ मेरी दोस्ती ज्यादा दिन तक टिकती नहीं थी। मैं बहुत जल्दी बोर हो जाता था। 2011 की बात है। मैं तीस साल का हो चुका था और मां-पापा शादी का दबाव डाल रहे थे। बंगाली मैट्रीमोनी डॉट कॉम पर मेरे पापा ने प्रोफाइल बनाया था। जितनी लड़कियों ने इंट्रेस्ट दिखाया था उसमें से स्मिता की प्रोफाइल पर जाकर मेरी नजर टिक गई। वह वाराणसी में पली-बढ़ी थी। लखनऊ से एमबीए किया था। मैं भी बीएचयू वाराणसी से पढ़ा था। मुझे स्मिता की स्माइल बहुत अच्छी लगी। वह दिल्ली में सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करती थी। मैंने मां-पापा को इस लड़की के मां-पापा से बात करने को कहा।

swaroop love story
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स्मिता और मेरे मां-पापा ने एक दूसरे से बात कर रास्ता साफ किया और एक दिन कॉल आया। स्मिता बोल रही थी। बहुत कॉन्फिडेंस था उसकी आवाज में। 10 मिनट बात करने के बाद मैंने कहा कि जी चैट पर बात करते हैं। अगले तीन महीनों तक स्मिता से फिर एक बार कॉल पर बात हुई जिसमें उसने कहा कि वह मिलना चाहती है। दिल्ली के होटल में हम दोनों का परिवारों के साथ मिलना तय हुआ।
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वाराणसी से स्मिता के मम्मी-पापा आए। मैं अपने मम्मी-पापा के साथ दिल्ली एक दोस्त की शादी के सिलसिले में आया था। दिल्ली के होटल में हम मिले। स्मिता और मुझे होटल की लॉबी में अकेले में बात करने का मौका मिला। एक घंटे से भी ज्यादा हम बात करते रहे तभी स्मिता की मां उसे खोजते हुए चली आई। अब विदा लेने का समय था। जाते-जाते स्मिता ने मैसेज पर पूछा कि मैं तुमको कैसी लगी। मैंने कहा कि बाद में जवाब दूंगा। उधर हम दोनों के मां-बाप शादी की तैयारियों में जुट गए।
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अप्रैल 2011 में स्मिता का उस दिन 28वां जन्मदिन था और उसी दिन धोनी की भारतीय टीम ने 28 सालों बाद विश्व कप जीता था। मैं मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में मैच देख रहा था और फोन का रिंग सुन नहीं पाया। फोन में स्मिता के 13 मिस्ड कॉल पड़े थे। उसने मैसेज किया कि भारत की जीत की खुशी मैं तुम्हारे साथ मनाना चाहती हूं। मैसेज देखना तो मुझे कॉल करना। मैंने तुरंत कॉल मिलाया और उसे कहा – आई लव यू। एक मिनट तक हम दोनों ही खामोश रहे। उधर से स्मिता ने कहा कि ये बर्थडे पर तुम मुझे गिफ्ट दे रहे हो? मुझे बेवकूफ मत समझो, बिना अच्छा गिफ्ट लिए इतनी आसानी से नहीं जाने दूंगी।

भारत की जीत की खुशी ने मेरे दिल में प्यार के रोमांच को और बढ़ा दिया था। मैंने कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूं और तुम्हारे साथ पूरी जिंदगी गुजारना चाहता हूं। स्मिता ने कहा कि मैं तुमसे गिफ्ट मांग रही हूं और तुम अपने आपको ही गिफ्ट के तौर पर दे रहे हो। फिल्मी मत बनो, जवाब दो – मुझे क्या दे रहे हो? स्मिता बोली कि मैं पहली बार जब मुंबई आऊंगी तो मुझे मरीन ड्राइव पर ले जाना और रातभर हम दोनों समंदर किनारे घूमते रहेंगे।

मैंने कहा – स्मिता, मैं जॉनी वाकर नहीं हूं। मैं रातभर तुम्हारे साथ कैसे घूम पाऊंगा? तुम मुंबई कब आ रही हो? तब स्मिता ने बताया कि उसने अपने पापा को मेरे पापा से कहते सुना है कि जुलाई में हमारी शादी की तारीख तय हो रही है। स्मिता ने कहा कि उसे मॉनसून सीजन पसंद है, वाराणसी के घाटों पर बारिश से उसे प्यार है। उसने कहा कि जुलाई शादी के लिए खूबसूरत मौसम रहेगा।

वाराणसी के जिस घाट की बात स्मिता कर रही थी वहां मैं बीएचयू में पढ़ाई करते समय दोस्तों के साथ लगभग रोज ही जाता था। मैंने स्मिता से कहा मॉनसून में मुंबई में भारी बारिश होती है और मैं तुम्हारी डिमांड को पूरी करने की कोशिश करुंगा। लेकिन श्री420 फिल्म के राज कपूर और नरगिस की तरह एक छाते में हम दोनों के जाने का ख्याल मत लाना। दो छातों की जरूरत पड़ेगी। स्मिता ने कहा कि हम रेनकोट पहनकर घूमेंगे।
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इसके बाद तीन महीने तक मेरी और स्मिता की बातें होती रहीं और प्यार बढ़ता ही चला गया। रोज रात को गुड नाइट का मैसेज आता तो स्माइल के साथ मैं सोता। दोनों फोन पर खूब बातें करते थे कि कैसे दिन बिताया, ऑफिस में क्या हुआ। हम दोनों एक दूसरे को अच्छी तरह से जान गए थे। स्मिता के साथ मेरी ट्यूनिंग अच्छी हो गई थी। मेरा कभी किसी लड़की के साथ सीरियस रिलेशनशिप नहीं बन पाया था। स्मिता पहली लड़की थी मेरी  जिंदगी में, जो मेरे दिल में उतरती चली गई।
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देखते-देखते जुलाई आ गया। एक दिन स्मिता दिनभर कॉल और मैसेज करती रही लेकिन मैंने कोई जवाब नहीं दिया। मेरी मां जसलोक हॉस्पिटल के आईसीयू में थी। मैंने शाम में स्मिता से कहा कि मेरी मां के लिए प्रार्थना करो, वह बहुत बीमार है और आईसीयू में भर्ती है। पिछले कुछ महीनों से मेरी मां को लगातार सिरदर्द हो रहा था लेकिन वो इग्नोर कर रही थी, पेनकिलर ले लेती थी। मां इसे बर्दाश्त कर रही थी और इसके बारे में मुझे या पापा को नहीं बताया था।

उस दिन मां को सिरदर्द बर्दाश्त से बाहर हो गया, उनको दिखना बंद हो गया। हॉस्पिटल में न्यूरोलोजिस्ट ने बताया कि उनके ब्रेन में एक गांठ है। यह गांठ कैंसर रोग का भी हो सकता था लेकिन जब जांच में ऐसा नहीं निकला तो मुझे राहत मिली। डॉक्टर ने कहा, ऑपरेशन से ठीक हो जाएगा। इसके बाद स्मिता से मेरी बात हुई तो उसने कहा कि भगवान हमारे साथ है, मम्मी जल्दी ठीक हो जाएगी।

बातों-बातों में स्मिता ने मुझे बताया कि उसके भी पेट में तीन साल पहले एक ट्यूमर हुआ था जो ऑपरेशन के बाद ठीक हो गया। तब मैंने पूछा कि ऑपरेशन में मां को तकलीफ तो नहीं होगी तो उसने कहा कि नहीं होगी। मेरी मम्मी का ऑपरेशन हुआ और तीन दिन बाद वह हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर घर आ गई।
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घर में मैं मम्मी-पापा के साथ ब्रेकफास्ट कर रहा था तो उनको बताया कि चिंता करने की जरूरत नहीं है। गांठ ऑपरेशन से ठीक हो जाता है। मैंने यह भी बताया कि स्मिता को भी ट्यूमर हुआ था जो ऑपरेशन से ठीक हो गया। इतना सुनते ही मेरे मम्मी-पापा एक दूसरे को देखने लगे। फिर पापा ने कहा कि स्मिता के मम्मी-पापा ने हमसे ये बात क्यों छुपाई। फिर मां ने कहा कि लगता है यह उन्होंने जानबूझकर किया।

मैंने जो बात हल्के में ली थी दरअसल वही भारी पड़ गई। स्मिता के बारे में जानकर मेरे मम्मी-पापा मेरी शादी के बारे में चिंतित हो गए। मां ने कहा कि मैंने स्मिता के मां-बाप से पूछा था कि क्या वह कभी गंभीर बीमारी का शिकार हुई है तो उन्होंने कहा था नहीं। अब ट्यूमर की बात उन्होंने छिपाई है तो न जाने और क्या-क्या छिपाया होगा?

पापा ने कहा कि मैं स्मिता के पापा से कह दूंगा कि आपने हमें धोखा दिया। यह शादी नहीं हो सकती। यह सुनते ही मेरे होश उड़ गए। जब तक मुझे होश आता, तब तक मेरे पापा स्मिता के पापा को फोन मिलाकर कड़े लहजे में अपनी बात कह चुके थे। उनकी जुबान पर एक ही बात थी, यह शादी नहीं हो सकती। मैं अपने पापा का विरोध न कर सका क्योंकि मुझे बचपन से यही सिखाया गया था कि शादी का फैसला मां-बाप की मर्जी से होता है।
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10 मिनट बाद स्मिता का कॉल आया तो मैंने रिसीव किया लेकिन कुछ बोल नहीं सका। उधर से स्मिता रोए जा रही थी। उसने कहा कि उसके पापा को ब्लड प्रेशर है और संबंध टूटने की बात सुनकर वह कुछ बोल नहीं पा रहे। मेरी क्या गलती है? मैं मम्मी से बात करना चाहती हूं, उनको फोन दो, मैं उनको बताती हूं कि मैं बिल्कुल फिट हूं। मैंने कुछ नहीं छिपाया। स्मिता बहुत रो रही थी। मैं कुछ बोल नहीं पाया तब तक मेरी फोन की बैटरी खत्म हो गई और फोन कट गया।

इसके बाद लैंडलाइन पर कॉल आने लगा लेकिन उसे रिसीव करने की हिम्मत नहीं हुई। हम सब जानते थे कि इसमें स्मिता की कोई गलती नहीं है क्योंकि अगर ट्यूमर वाली बात छिपानी ही होती तो वह मुझे क्यों बताती। फोन फिर बजा और मेरी मां ने उसे रिसीव किया। पहले तो वह स्मिता की बातें सुनती रही फिर खुद रोते हुए बोली, स्मिता तुम अच्छी लड़की हो, लेकिन मैं भी एक मां हूं। शादी के बाद अगर यह बात पता चलती तो मैं इसे भगवान की इच्छा समझकर स्वीकार कर लेती। लेकिन पहले पता चला है इसलिए इसे भी मैं भगवान का दिया संदेश मान रही हूं जिसे इग्नोर नहीं कर सकती। अगर यह शादी हुई और तुम्हारी बीमारी ज्यादा बढ़ी तो मैं खुद को नहीं माफ कर पाऊंगी। इसके बाद फोन कट गया। स्मिता भगवान के लॉजिक का जवाब नहीं दे पाई।

इस तरह से अचानक मेरा और स्मिता का गहरा रिश्ता पल में खत्म हो गया। मैं अपने मां-बाप के खिलाफ जा नहीं पाया और स्मिता को कॉल नहीं किया। मैं स्मिता से प्यार करता था तो अपने मां-बाप से भी प्यार करता था। दोनों में से मुझे एक को चुनना था और मैंने मां-बाप को चुना। एक दिन बाद स्मिता का कॉल आया तो मैंने बेरुखी से कहा – देखो स्मिता, हम दोनों का रिश्ता लव अफेयर नहीं था। यह एरेंज्ड था। मां-बाप ने हम दोनों को मिलाया था और अब जब वे इस रिश्ते के पक्ष में नहीं हैं तो इसे आगे बढ़ाने का कोई मतलब नहीं है। तुम मुझे आगे कभी कॉल मत करना, यही बेहतर होगा।

इसके बाद स्मिता गुड नाइट का मैसेज लिखना छोड़ रोज मुझे ब्लैंक मैसेज भेजने लगी लेकिन मैंने कोई जवाब नहीं दिया। इस तरह से एक महीने तक मुझे वह बिना कुछ लिखे मैसेज भेजती रही और आखिरकार उसने लिखा – यह मेरा लास्ट मैसेज है। मैं तुमको भूलने की कोशिश करुंगी, लेकिन भूल नहीं पाऊंगी।

इसके बाद अगले दो साल तक मेरे मां-बाप जिस लड़की का रिश्ता मेरे लिए लाते रहे, मैं उस लड़की में स्मिता को खोजता रहा। जब भी किसी लड़की से मिलना तय होता, मैं स्मिता के बारे में सोचता। दो साल तक ऐसे ही चलता रहा। 2013 में मुझे अपनी गलती का ज्यादा अहसास होने लगा तो सोचा कि फेसबुक पर स्मिता को मैसेज करता हूं। मैंने फेसबुक पर उसे खोजा। वह मेरी फ्रेंडलिस्ट में नहीं थी। सर्च में स्मिता चटर्जी लिखा। और कई प्रोफाइल में से उसे खोज निकाला। उसकी टाइमलाइन देखा तो उम्मीदें बुझ गईं। एक फोटो में स्मिता दुल्हन की तरह सजी थी, बहुत सुंदर लग रही थी और उसके चेहरे पर वही खूबसूरत स्माइल थी जिसको देखकर मैं उस पर फिदा हुआ था।

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