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राधा ने किशन की खातिर उम्रभर शादी नहीं की – माया की रियल लव स्टोरी

कान्हा की नगरी में बेटी अकेली रह गई। मैं ही वो बेटी हूं - माया - किशन और राधा की बेटी। और ये मेरे मम्मी-पापा की लव स्टोरी है।

मैं माया हूं। मैं आंखो देखी एक लव स्टोरी आपको सुना रही हूं। यह 1985 के आसपास की बात है। राधा आगरा की थी और किशन दिल्ली का था। किशन की आगरा में राधा से मुलाकात हुई थी। दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे और शादी करना चाहते थे। दोनों ने अपने-अपने घर में बात की तो राधा की मिडिल क्लास फैमिली तो शादी के लिए राजी हो गई लेकिन किशन की बिजनेसमैन फैमिली इस शादी के लिए राजी नहीं हुई। किशन ने बहुत कोशिश की लेकिन वो नहीं माने। किशन की बहन के ससुराल वालों की रिश्तेदारी की एक लड़की से उनकी शादी लगी थी। ससुराल वालों ने कहा कि अगर किशन ने शादी नहीं की तो वो उनकी बहन पर जुल्म करेंगे। इसलिए किशन बहन की खातिर मजबूर हो गया और उसे शादी करनी पड़ी।

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शादी के बाद भी किशन, आगरा वाली राधा से मिलता रहा। राधा टीचर बन गई थी और मथुरा में वो रहने लगी थी। उसने किशन से प्यार किया और अपनी शादी न करने की सोची। राधा ने सोचा कि अपने बूढ़े मां-बाप की सेवा करेगी। राधा प्रेग्नेंट हो गई थी तो घरवालों ने उसे बहुत समझाया लेकिन उसने बच्चे को जन्म देने की ठानी। इसके बाद किशन ने भी कहा कि वह जीवनभर साथ देगा। राधा के मां-बाप को छोड़ पूरी फैमिली लड़की के इस कदम के खिलाफ हो गई और रिश्तेदार उल्टी सीधी बातें करने लगे।
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राधा ने एक प्यारी सी गुड़िया को जन्म दिया तब किशन मथुरा में ही था। किशन ने राधा से दिल्ली चलने को कहा। लेकिन राधा नहीं गई। वह बेटी के साथ मथुरा में ही रही। किशन, बीच-बीच में राधा और बेटी से मिलने आते थे। वे दोनों से बहुत प्यार करते थे। राधा के साथ उसके मां-बाप भी रहते थे। लेकिन राधा की मां जब नहीं रहीं तो उसका भाई आया और पिता को ले गया। राधा के नाजायज रिश्तों की वजह से उसने बहन से रिश्ता तोड़ लिया।
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लेकिन किशन ने राधा का साथ दिया। राधा टीचर थी, वह बेटी को पालते हुए मथुरा में रही। वक्त बीतता गया। बच्ची भी बड़ी हो गई। राधा और किशन के रिश्ते के बारे में जब किशन की दूसरी बीवी को पता चला तो हंगामा खड़ा हो गया और दोनों का मिलना कुछ दिनों के लिए बंद हो गया। राधा ने भी किशन की परस्थितियों को समझा। उसने किशन को भी समझाया कि हम लोग तो वैसे भी साथ में है, हम दोनों की वजह से तुम्हारा बसाया घर टूटे, बच्चों का दिल टूटे, यह अच्छी बात नहीं।
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राधा और किशन का मिलना जुलना कम होता चला गया। लेकिन किशन राधा और बेटी के कॉन्टेक्ट में हमेशा रहता था। बेटी अब कम से कम 18 साल की होने को आ रही थी। बेटी को भी मां और पापा की लाइफ के बारे में कुछ-कुछ पता चल गया था पर वह समझदार थी इसलिए उसने उन दोनों को समझा और अपने मां-पापा के रिलेशन को स्वीकार किया। लेकिन तभी किस्मत ने अजीब दर्दनाक खेल खेला।
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एक एक्सीडेंट में राधा बुरी तरह घायल हो गई। 18 साल की बेटी शहर में अकेली थी, उसने हिम्मत कर पापा किशन को फोन किया। जब तक किशन आए तब तक राधा भगवान को प्यारी हो चुकी थी। किशन नें अपनी बीवी और बच्चों से बात की, बेटी को मथुरा से दिल्ली ले आए। लेकिन बेटी को दूसरी मां ने बिल्कुल पसंद नही किया। बेटी की वजह से किशन के परिवार में झगड़े होने लगे। किशन दिल के मरीज थे और उनको दो बार अटैक पड़ चुका था। पापा की हालत देखकर बेटी ने दिल्ली से फिर अपने शहर मथुरा लौटने का फैसला लिया।
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पापा किशन ने बेटी को बहुत रोका लेकिन वह नहीं रुकी। उसको डर था कि वह रहेगी तो पापा बीमार रहेंगे और घर में क्लेश से उनको हार्ट अटैक हो सकता है। उसने पापा को समझाया कि उस शहर में उसकी यादें हैं, मां की यादें हैं, वह उसके साथ जी लेगी। वह अपने शहर के पुराने मकान में लौट आई। उसने मथुरा में नाना और मामा से कॉन्टेक्ट करने की कोशिश की लेकिन मामा ने साथ नहीं दिया।
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बेटी ने हार नहीं मानी। उसने मथुरा में संघर्ष किया और आज वह अपना बिजनेस कर रही है। इस बीच उसके पापा को हार्ट अटैक आया और वो दुनिया में नहीं रहे। उससे मां राधा और पापा किशन दोनों छिन गए। और कान्हा की नगरी में बेटी अकेली रह गई। मैं ही वो बेटी हूं – माया – किशन और राधा की बेटी। और ये मेरे मम्मी-पापा की लव स्टोरी है।

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