मेरा शादीशुदा प्रेमी कहता है, अपने पति को छोड़कर मेरे पास आ जाओ – बिहार से आरुही की लव स्टोरी

मेरा नाम आरुही है। मैं बिहार के एक शहर से हूं। मेरी एक दोस्त की शादी में उसके रिश्ते का एक लड़का आया था। उसने घरवालों से मेरे बारे में पूछा। वो लड़का मेरे ही शहर में अपने मामा के यहां रहकर पढ़ाई कर रहा था। उसकी फैमिली और मेरी फैमिली में अपनापन था तो वो आता जाता था। वो मुझे लाइक करता था, यह बात मैं नहीं जानती थी। वो मेरे घर आता तो मुझसे बात करने की कोशिश करता लेकिन मैं ज्यादा बात नहीं करती थी।

love story aaruhi
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वो मुझसे प्यार करने लगा और मुझे लव लेटर दिया जिसे मैंने उसे बिना पढ़े लौटा दिया। फिर भी उसने हार नहीं मानी, उसने फिर लेटर भेजा। उसने मुझे बहुत परेशान कर दिया तो मैंने उसका लेटर पढ़ा। उसमें लिखा था कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं, अभी तक मैंने किसी भी लड़की से इतना प्यार नहीं किया। तुम्हें पहली बार देखा तबसे ही तुमसे प्यार करने लगा।

उसका लव लेटर पढ़ने के बाद भी मैंने उसे कोई रिप्लाई नहीं दिया। उसने और भी बहुत सारा लेटर भेजा, रिप्लाई मांगी फिर भी मैंने नहीं दिया तो खुद को ही हर्ट करने लगा। उसने अपने आपको चोट पहुंचाना शुरू कर दिया। उसके बाद मेरे दिल में उसके लिए हमदर्दी जाग गई। यह 2009 की बात है। तब मैं 9वीं में पढ़ती थी।
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मैं भी धीरे धीरे बात करने लगी और पता ही नहीं चला कि कब मैं उससे प्यार करने लगी। हम दोनों की कास्ट सेम थी। मैं भी उसे बहुत चाहने लगी। हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। एक दिन एक दूसरे को नहीं देखते तो हम दोनों को बेचैनी होने लगती। वो मामा का घर छोड़कर हमारे सामने वाले घर में रहने आ गया। कुछ टाइम बाद घरवालों को हम दोनों के प्यार के बारे में पता चल गया।
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मेरे बीएफ के घरवालों को कोई प्रॉब्लम नहीं थी। उसकी मां भी मुझे बहुत प्यार करती थी। मुझे भी बहुत लगाव था उसकी मां से। लेकिन मेरे घरवालों ने मेरे प्यार को एक्सेप्ट नहीं किया। वो लोग मेरे प्यार के खिलाफ थे। 2010 की फरवरी में मेरी शादी उन्होंने कहीं और फिक्स कर दी। मैं अपने मां पापा के खिलाफ नहीं जा सकती थी। मेरा बीएफ का प्यार एक साल का था। मेरी शादी होनेवाली थी और कुछ समझ नहीं आ रहा था कि हम दोनों क्या करें?
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कभी कभी हम दोनों सोचते थे कि खुदकुशी कर लेते हैं। उस समय एक दूसरे के अलावा कोई दिखाई नहीं देता था। फिर हमलोगों ने सोचा कि चलो शादी कर लेते हैं। हम लोगों ने मंदिर में जाकर शादी कर ली। घरवालों को पता चल गया कि हम दोनों शादी करने गए हैं। उसके बाद मेरे घर से कॉल आया कि मेरे पापा की तबियत बहुत खराब हो गई है तो फिर हमलोग घर वापस आए। मैं बीएफ के साथ पहले उसके घर गई। वहां घरवालों ने दिलासा दिया कि एक सप्ताह में हम दोनों की शादी करा देंगे।
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मुझे याद है कि जब मैं अपने बीएफ के घर से लौटने लगी तो हम दोनों एक दूसरे से गले लगकर बहुत रोए थे। ऐसा लग रहा था कि मेरी जिंदगी मुझसे बहुत दूर हो रही है। ऐसा लगता था कि जैसे सांसें थम गई हो। फिर मेरे घरवालों ने मुझे मेरे मामा के घर भेज दिया। हमलोग अलग अलग हो गए और बहुत तड़पे। बात भी नहीं हो रही थी। उसके बाद मैं उससे मिल नहीं पाई। मेरी शादी का दिन नजदीक आने लगा तो भी मैं उससे मिलने की कोशिश करती रही लेकिन पता चला कि उसे भी कहीं दूर रखा गया है।
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फिर मेरी शादी हो गई। उसके बाद बात हुई तो हम दोनों बहुत रोए। फिर भी हम लोगों ने बात करनी नहीं छोड़ी। दो साल बाद उसने भी घरवालों के दबाव में आकर शादी कर ली। फिर भी हमलोगों ने प्यार करना नहीं छोड़ा। मेरे हसबैंड सरकारी नौकरी करते हैं और बहुत कम मेरे पास रहते हैं। वो अपने काम में बिजी रहते हैं। मैं कुछ सालों से मायके में रह रही हूं।

शादी के बाद भी मेरा और उसका प्यार वही है। मझे अभी कोई बच्चा नहीं है लेकिन उसके दो दो बच्चे हो गए हैं। लेकिन फिर भी हमलोगों का प्यार कम नहीं होता है। वो मुझे आज भी शादी करने के लिए कहता है। बोलता है कि सबकुछ छोड़कर मेरे पास आ जाओ। वो ये क्यूं नहीं समझता कि उसकी बीवी बच्चे हैं, एडजस्ट नहीं हो सकता। वो बोलता है कि किसी भी हाल में रहेंगे और तुम आ जाओ, हम तुम्हें एक्सेप्ट करेंगे, जिंदगीभर तुम्हारा इंतजार करेंगे।
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मैं क्या करूं? कुछ समझ नहीं आता है। मैं भी तो उससे उतना ही प्यार करती हूं। लाख समझा लो, ये दिल है कि मानता नहीं है, मैं भी उसे जिंदगीभर भूल नहीं सकती। वो मेरी लाइफ का पहला प्यार है। मैं उसे सबसे ज्यादा प्यार करती हूं। उसके नाम से आज भी मेरी धड़कन तेज होती है। मैं आज भी उससे बात किए बिना नहीं रह सकती हूं और वो भी नहीं रह सकता है। जब वो मेरे सामने होता है तो मैं खुद को भी भूल जाती हूं। काश वो मेरे सामने जिंदगीभर रहे, मैं उसे देखकर ही पूरी जिंदगी गुजार दूं। आज भी उसकी यादों ने मुझे रुला दिया है।

मां बाप बच्चों की खुशी के लिए कितना कुछ करते हैं और जो खुशी उनकी लाइफ का सबसे बड़ी खुशी हो, उसी को छीन लेते हैं। उनको अपनी इज्जत प्यारी होती है। समाज की परवाह होती है लेकिन अपने बच्चों की खुशियां नहीं देखते हैं। मां बाप को भी बच्चों को समझना चाहिए।

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