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उसके घर में पता चला कि वो प्यार करती है तो उसे मौत मिली – मिस्टी की रियल लव स्टोरी

मैं शिवानी हूं। पटना में रहती हूं। 2007 की बात है। मैं इंटरमीडिएट की परीक्षा के बाद पटना से अपने गांव गई थी। बिहार का एक छोटा सा गांव जहानाबाद। हमारी फैमिली बहुत बड़ी है। मेरी एक चचेरी बहन मिस्टी थी जिसके घरवाले बेटियों को पढ़ाने के खिलाफ थे। लेकिन मैं मिस्टी के लिए कहानियों की किताबें लेकर जाती थी। हम दोनों में बहुत अच्छी दोस्ती थी।

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एक दिन मिस्टी ने बताया कि दूसरे गांव का एक लड़का जो हमलोगों के ही कास्ट का है, उसे मैं बहुत अच्छी लगती हूं और वो मुझसे शादी करना चाहता है। मैंने पूछा कि कब से ये सब चल रहा है तो बोली कि 8 महीने से दोनों का रिश्ता है। मिस्टी बोली कि गुस्सा मत करना, बस अच्छा लड़का है या नहीं यह चेक करने के लिए तू भी मिल ले, और किसी से मैं बोल नहीं सकती हूं।

मैं जानती थी कि अगर किसी बच्चे को भी ये बात पता चली तो मिस्टी के घरवाले उसके साथ कुछ भी कर सकते हैं। वो लड़का ग्रेजुएट था और बिजनेस करता था। मैंने भी सोचा कि सबकुछ तो अच्छा है, सेम कास्ट भी है। मैंने मिस्टी से कहा कि तू अपनी मां से बोल, अगर वो कुछ बोलेंगी तो फिर मैं बात करूंगी उनसे।

मिस्टी अपनी मां की अकेली बेटी थी तो उसे बहुत प्यार मिला था। उसने अपनी मां से बात की। उसकी मां यानि चाची ने फिर मुझसे पूछा तो मैंने कहा कि वो बहुत अच्छा है, हमारे ही कास्ट का है और बगल के गांव का है। मैंने कहा कि चाचा से बोलकर और पता करा लेना।

चाची ने जब चाचा का अच्छा मूड देखा तो उनसे बोली कि मिस्टी किसी से बात करती है, अपनी ही जाति का है और कमाता भी है। चाचा ने कहा कि जात का हो या बेजात का, हमारे घर की लड़की खुद से लड़का नहीं पसंद कर सकती। उन्होंने चाची से पूछा कि किसी और को ये बात पता है तो उन्होंने मेरा नाम नहीं बताया और ये उन्होंने बहुत अच्छा किया।
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मेरी चाची नहीं जानती थी कि क्या होने वाला है। रामनवमी की पूजा की मार्केटिंग के लिए चाचा ने मिस्टी को साथ चलने को कहा। मिस्टी जिंदा गई थी लेकिन वापस उसकी लाश आई। हमें कुछ भी नहीं पता था, ना कोई कुछ पूछ रहा था। बस सबलोग रो रहे थे।
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चाची ने तब से आज तक मुझसे बात नहीं की। घर के आदमियों की बातें सुनी तो पता चला कि चाचा मिस्टी को एक डॉक्टर के पास ले गए और जहर का इंजेक्शन लगवा दिया। क्रिया कर्म भी जल्दी में ही हुआ था। हमलोगों ने बॉडी नहीं देखी थी उसकी।
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उस वक्त ऐसा लगा कि शायद मिस्टी की मौत के लिए मैं ही जिम्मेदार हूं। गांव से हम तुरंत वापस लौटकर पटना आ गए। मैंने यहां मम्मी और दादी को ये बात बताई तो उन्होंने किसी और को ये कहने से मना किया। सभी मुझ पर गुस्सा हुए जैसे मैंने उसे मारा हो। लेकिन मैंने उसे नहीं मारा…
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2011 में मैं फिर गांव गई थी तो वहां मुझे लड़के की बहन मिली जिसकी शादी मेरे ही गांव में हुई थी। मैंने उनसे पूछा कि आपके भाई की शादी हो गई? तो उन्होंने बताया कि 2007 में ही वो बिना बताए घर से कहीं चला गया और अब तक वापस नहीं आया।

मेरी एक गलती से क्या से क्या हो गया। प्लीज मिस्टी माफ कर देना बहन।

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