मैं पहले प्यार को भूल नहीं और दूसरे प्यार को अपना नहीं पाई – सना की लव स्टोरी

मेरा नाम सना है और मैं छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज में रहती हूं। मैं शाहबाज से बेइंतहा प्यार करती हूं। लेकिन 2014 में हमारा ब्रेकअप हो गया और उसकी वजह मैं खुद थी। मुझे लगता था कि मैं शाहबाज के लायक नहीं हूं इसलिए मैं उससे दूर हो गई थी जबकि शाहबाज मुझसे बहुत प्यार करता था। उसकी जिंदगी में सिर्फ मैं ही थी लेकिन मेरी सोच ने मुझे आखिर में बर्बाद कर डाला।

love story of sana
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एक दिन ऐसा भी हुआ था जब शाहबाज मुझे समझाते समझाते रो पड़ा और कहता रहा कि सना, तू ऐसा मत सोच कि तू मेरे लायक नहीं है, तू अगर मेरे लायक नहीं होती तो क्या तुझको कभी प्यार करता, यार दिन रात बात करता हूं, दिल से चाहता हूं, मगर तू एक छोटी सी सोच की वजह से मुझसे दूर रहती है, देख लेना शाहबाज जैसा प्यार तुमको कोई नहीं करेगा सना…
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लेकिन मैं हमेशा यही सोचती रहती थी कि शाहबाज के मैं लायक नहीं हूं और कैसे उसको मैं खुद से दूर करूं? मैं चाहती थी कि मेरे शाहबाज को मुझसे ज्यादा खूबसूरत लड़की मिले और उसके घरवाले भी खुश हों। शाहबाज तो बस दीवाना है, उसे नहीं पता कि मुझसे शादी करके कितना अफसोस करेगा। मैं यही सब सोचती रहती थी।
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मैं शाहबाज से दूर जाने के लिए उससे झूठ बोलने लगी। शाहबाज आखिरकार मुझसे दूर चला गया और मैं जिंदगीभर के लिए तन्हा हो गई। मैं जानती थी कि शाहबाज के बिना नहीं रह पाऊंगी, उसके बिना सब खत्म हो जाएगा, फिर भी दूर हो गई। शाहबाज से फोन पर भी बात नहीं होती थी और मेरी हालत खराब होने लगी थी। मैंने ऐसा सोचा न था कि शाहबाज को खोकर मेरा ऐसा बुरा हाल हो जाएगा। मैं टूट जाऊंगी। मुझे खुद से नफरत होने लगी।
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शाहबाज के जाने के बाद मैं दिल बहलाने के लिए फेसबुक चलाने लगी। आठ महीने गुजरने के बाद एक लड़के से मेरी गहरी दोस्ती हुई। शफीक नाम था उसका, राजस्थान के सीकर से था। धीरे धीरे हम बहुत क्लोज होते गए। शफीक को मैंने शाहबाज के बारे में बताया लेकिन वो मुझसे प्यार करने लगा था लेकिन मैं तो शाहबाज से ही प्यार करती थी। शफीक को इतना प्यार हो गया कि वह मुझसे मिलना चाहता था।
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शफीक मुझसे 1500 किलोमीटर दूर था लेकिन कभी अहसास नहीं होता था कि वह दूर है मुझसे। वह राजस्थान से मेरे लिए गिफ्ट भेजा करता था। मुझसे बोलता था कि तुम बीता हुआ कल भूल जाओ। मैं शफीक को प्यार करने लगी थी लेकिन दिल में जो शाहबाज के लिए जगह थी, वह उसे नहीं दे पाई।

शफीक एक दिन मुझसे मिलने छत्तीसगढ़ चला आया। उसने एक बार भी ये नहीं सोचा कि मैं गलत लड़की भी हो सकती हूं क्योंकि वो सिर्फ मुझे फेसबुक से जानता था। वह मिला तो जैसा लगा कि मुझे जन्नत मिल गई। मैंने उससे पूछा कि तुमको डर नहीं लगा, अपनी जिंदगी की कोई परवाह नहीं तो कहने लगा कि तुम उसकी जिंदगी हो। उसने कहा कि मैंने सोचा था कि तुमसे मिलने के बाद मौत भी आई तो परवाह नहीं क्योंकि तुमको जान से भी ज्यादा प्यार करता हूं।
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शफीक ने कहा कि मैं शाहबाज नहीं हूं जो परेशान होकर चला जाए। तुझने देखने मैं चला आया। शफीक मुझसे मिलकर चला गया। इसके बाद वे मुझे हमेशा पाने की, शादी करने की बातें करता था। मेरे साथ जीने मरने के सपने देखता था। मुझे अजीब सा लगने लगा उसका प्यार देखकर। मैं कभी शादी नहीं करना चाहती थी। शफीक यह सुनकर बहुत रोता था कि मैं कभी शादी नहीं करूंगी। वह भी कहने लगा कि तू नहीं करेगी तो मैं भी नहीं करूंगा।

इसके बाद मैं शफीक को भी खुद से दूर करने लग गई क्योंकि मैं शादी नहीं करना चाहती थी। उसे दर्द होता था, तड़पता था और मैं उससे कहती थी कि शफीक तुम अपने मम्मी पापा के पसंद से शादी कर लो। मैं हमेशा अकेली जिंदगी जीने के बारे में सोचा करती थी। मेरे हाथ पर शाहबाज का टैटू बना था जो कभी मिट नहीं सकता था। शफीक को इन सबसे कोई फर्क नहीं पड़ता था, वह बस मुझे पाने की जिद किए बैठा था।
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मैंने शफीक को भी दूर जाने को कहा तो वो भी शाहबाज की तरह मुझे समझाता रहा। दिन गुजरता चला गया। 2017 में इसी महीने यानि मई में 1 तारीख को मैं उससे दूर हो गई और बात करनी बंद कर दी। लेकिन 3 दिन बाद वापस लौटी उससे बात करने तो वह अजीब और अलग सा बिहेव करने लगा। शफीक इतना बदल गया था कि मुझसे बात तक करना उसे पसंद नहीं था। जो लड़का मेरे बिना एक पल जीने की सोच नहीं सकता था वो तीन दिन में इतना बदल गया।
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मुझे शफीक के दूर जाने का अफसोस होने लगा तो मैं उसके सामने फोन पर रोने लगी मगर वह नहीं माना। कहने लगा कि दर्द क्या होता है, तू भी महसूस कर। शफीक ने एक बार भी ये नहीं सोचा कि सना लौटकर आई है तो जो हुआ उसे भूल जाए। शफीक ने मुझे ठुकरा दिया और मैं फिर अकेली हो गई।
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मैं नासमझ थी लेकिन शफीक तो समझदार था। वह तो प्यार को समझता था फिर दूर क्यों चला गया। मेरा दिल एक बार नहीं, दो बार टूट गया। अब तो मैं किसी से प्यार भी नहीं कर सकती, मेरी तमाम उम्र मेरे नाकाम-ए-इश्क के नाम।

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