ब्वॉयफ्रेंड के बहकावे में आकर ये क्या कर बैठी – पटना से शबाना की लव स्टोरी

मैं पटना से शमा हूं और पटना साहिब में रहती हूं। मेरे मुहल्ले में मेरी सहेली रेहाना की बहन शबाना के साथ दर्दनाक वाकया हुआ है। शबाना अभी 17 साल की है। उसके ब्वॉयफ्रेंड ने उसको कहा था कि अगर तुम प्रेग्नेंट हो जाओगी तो हमारे घरवाले शादी के लिए मजबूर हो जाएंगे।

love story of shabana
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शबाना ब्वॉयफ्रेंड के बहकावे में आ गई और वह सच में प्रेग्नेंट हो गई। उसने ब्वॉयफ्रेंड को बहुत कॉल किया लेकिन उसने उठाया ही नहीं। न ही उससे मिला। जब इस बात का पता शबाना के घरवालों को पता चला तो गर्भ में पल रहा बच्चा छह सप्ताह का हो चुका था। अभी तीन दिन पहले की बात है।

शबाना के मां-बाप ने तय किया कि उसका अबॉर्शन करा देंगे वो भी किसी डॉक्टर से नहीं। उनका कहना है कि डॉक्टर के पास जाएंगे तो बदनामी होगी। अब शबाना की जान भी जा सकती है लेकिन मां-बाप उसको लेकर चुपके से बुआ के यहां जा चुके हैं।
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शबाना के बोर्ड का रिजल्ट आया है। वह अच्छे नंबर से पास हुई है। वह बहुत प्यारी सी बच्ची है लेकिन उसकी जिंदगी तो बर्बाद हो गई। प्रेग्नेंसी का पता चलने पर उसे मां-बाप ने घर में बंद कर दिया। मां-बाप को कोई मतलब नहीं कि लड़के का पता लगाए। वो तो बस लड़की को मैनेज करना चाहते हैं। लड़के को जब शबाना की प्रेग्नेंसी का पता चला तबसे उसने रिश्ते से किनारा कर लिया।
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शबाना की जान जाए तो जाए लेकिन उसके मां-बाप को बस अपनी इज्जत की चिंता है। शबाना को अब मां-बाप आगे नहीं पढ़ाएंगे। अबॉर्शन हो सका तो ठीक नहीं तो फिर प्रेग्नेंसी छुपाकर उसकी शादी कर दी जाएगी। उसका प्रजेंट इतना भयानक है तो शादी के बाद जाने क्या होगा?
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उस बच्ची की लाइफ तो बर्बाद हो गई इस इज्जत के चक्कर में। लड़की हमेशा अपने घर की इज्जत की चिंता करती है लेकिन उससे गलती हो गई तो जब अपने ही माफ नहीं कर रहे तो गैर क्या करेगा? पर क्या इज्जत सिर्फ लड़कियों की होती है, उस लड़के ने जो किया, वो गलत नहीं था?
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मैंने शबाना से बात करने की कोशिश की लेकिन घरवालों ने मना कर दिया। इसके बाद मैंने उसकी बड़ी बहन रेहाना से बात की तो उसने कहा कि घर के मामले में वह कुछ नहीं कह सकती। वो अपनी फैमिली में प्रॉब्लम नहीं चाहती। शबाना के भाई भी कुछ नहीं कर सके। वो भी फैमिली के साथ हैं।
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शबाना खुद भी दोषी महसूस कर रही है। उसे उसके मां-बाप और भाभी ताने देते हैं और कुछ भी बोलकर चले जाते हैं। शबाना रोती रहती है और कहती है कि बस एक बार माफ कर दो, फिर से गलती नहीं करूंगी। लेकिन उसके लिए कोई माफी नहीं है। उसे बस माफी चाहिए, घरवाले वो भी नहीं दे रहे।
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जब हम मुसीबत में होते हैं तो हमारे परिवार वाले साथ देने के बजाय हमारी मुसीबतों को और बढ़ा देते हैं। सोचती हूं, ये कैसा फैमिली सिस्टम है जहां अपने ही अपनों पर इस तरह का जुल्म करते हैं। छह सप्ताह के बच्चे का अबॉर्शन कराएंगे तो शबाना की जान भी जा सकती है लेकिन इज्जत के लिए एक मासूम की जान जाए वो सही, यही हमारे समाज के परिवारों की नंगी हकीकत है और बेटियों के साथ ऐसा ही बुरा सलूक किया जाता है।

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