पापा की खुशी के लिए मैंने शादी की, अब एक दुखी जिंदगी में फंस गई हूं

मैं माधवी, बिहार की हूं। मैं अपने पापा-मम्मी और परिवार से बहुत प्यार करती हूं और उनकी खुशी, प्यार ने ही आज मुझे ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां पहुंचकर मैं काफी दुखी हूं और आगे पता नहीं मैं कैसे जीऊँगी।

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दो साल पहले जब मैं 18 साल की हुई तो पापा ने मेरे लिए रिश्ता खोजना शुरू कर दिया। मैंने इंटर का एग्जाम दिया था। मेरा एक दोस्त है जो मुझसे उस समय प्यार करता था और मैं भी उससे बात करती थी। हम दोनों ने एक दूसरे से कभी नहीं कहा कि हमें प्यार है। फिर भी हम दोनों को एक दूसरे का साथ अच्छा लगता था। जब मेरे पापा ने मेरे लिए रिश्ता खोजना शुरू किया तो मैंने अपने दोस्त से कहा कि अब हमें आगे बात नहीं करनी चाहिए वरना बाद में मुश्किल होगी। इसके बावजूद वो मुझे कॉल करता लेकिन मैंने फोन उठाना बंद कर दिया। इसके बाद हम दोनों अलग हो गए।
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मैं अपने पापा से बहुत प्यार करती हूं और उनकी लाडली बेटी हूं। मैं उनको दुखी नहीं कर सकती। 2017 में उनको मेरे लिए लड़का मिल गया। वो सरकारी नौकरी करता है। मेरे पापा ने इस शादी के लिए मेरी रजामंदी नहीं ली। अचानक सबकुछ तय कर दिया और मेरी इंगेजमेंट कर दी। मैं कुछ सोच नहीं पाई क्योंकि एक तरफ मैं इस बारे में ज्यादा नहीं समझ नहीं पाती थी, दूसरी तरफ पापा के लिए कुछ भी कर सकती थी। मेरे सभी रिश्तेदार मुझे खुशनसीब कह रहे थे और लड़के की बहुत तारीफ कर रहे थे।
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मेरे पापा ने जीवनभर की जमापूंजी से दहेज दिया और फरवरी 2017 में मेरी शादी कर दी। मैं अब 20 साल की हूं। मेरे पति इलाहाबाद में पोस्टेड हैं तो शादी के बाद मैं वहीं गई। वहां दो कमरों में सात लोग रह रहे थे। काफी गर्मी थी। कूलर जैसी चीजों की कोई सुविधा नहीं थी। इतनी गर्मी में भी घूंघट ओढ़ने की मजबूरी थी। मेरा पति यही कहता रहा कि हम जैसे रह रहे हैं, इसी में ये भी रहेगी। मैं काफी सुख-सुविधा में पली-बढ़ी थी। मेरे पिता ने जो भी सामान दिए थे, उनको उन्होंने बिहार वाले घर पर रख दिया था।
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मेरा पति हमेशा मुझसे बुरा बर्ताव करता रहा। पता चला कि वह एक लड़की से प्यार करता था जिसे वह पा नहीं सका था। पति हमेशा बदतमीजी से बोलता। उसने एक बार बातों-बातों में कह दिया कि हां, वह उस लड़की से प्यार करता है। घर में कोई प्राइवेसी नहीं थी। हम दोनों शादी के बाद भी एक-दूसरे साथ वाइफ-हसबैंड जैसे नहीं रह पाए। हमारे बीच जब भी बात होती तो झगड़ा होता। मैं जैसे ससुराल में कैद हो गई थी।
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मेरी शादी एक शर्त पर हुई थी कि मैं ग्रेजुएशन की पढ़ाई अपने मां-बाप के पास रहकर पूरी करूंगी। मैं आगे पढ़ना चाहती थी लेकिन ससुरालवाले तैयार नहीं थे। फिर भी वो ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई के लिए मान गए थे। शादी के समय मेरा फर्स्ट ईयर चल रहा था। अब मैं अपने मां-बाप के घर रह रही हूं। ससुराल से आई तो मैंने किसी को कुछ नहीं बताया क्योंकि मैं किसी को दुखी नहीं करना चाहती थी।
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मेरे पापा बहुत खुश रहते हैं। वो सोचते हैं कि मैं बहुत खुश हूं। मेरे रिश्तेदार भी मेरी शादी से खुश हैं। अब मैं उनको अपना दुख बताकर कैसे दुखी करूं? मैं भी इसलिए झूठ बोलती हूं, हंसने का नाटक करती हूं। जब दुख बढ़ जाता है तो कॉपी-कलम लेकर बैठ जाती हूं। कुछ लिखती हूं तो दिल हल्का हो जाता है। इस बीच इंटर का मेरा दोस्त, जिंदगी में लौट आया। वो भी सोचता है कि मैं खुश हूं। उससे मेरी बात होती है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मैं उसके साथ रिश्ता जोड़ना चाहती हूं।
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मैं कैरेक्टरलेस नहीं हूं। मेरा दोस्त तो सोचता है कि मैं इस शादी के बाद खुश हूं और उसकी खुशफहमी को मैं दूर नहीं करना चाहती। मेरी शादी के बाद शायद वह मन ही मन नफरत करता है और अगर मैं उसको अपना दुख बता दूंगी तो शायद फिर से प्यार करने लगेगा। यही वजह है कि मैं किसी को कुछ नहीं बताती। मेरे रिश्तेदार, पापा भी खुश रहते हैं मुझे देखकर। सोचते हैं कितनी अच्छी जगह शादी हुई है।
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तो मेरे पापा, परिवार, रिश्तेदार, दोस्त, किसी को कुछ पता नहीं कि शादी के चार महीने में ही मेरी जिंदगी कितनी दुखद हो चुकी है। मैं कई बार सोचते-सोचते डिप्रेशन में चली जाती हूं कि आगे क्या होगा? मुझे पापा, रिश्तेदारों की खुशी के लिए इस शादी को जैसे हो, जीना होगा। ऐसा नहीं है कि मैंने अपने पति को अपनाने की कोशिश नहीं की। कोशिश की लेकिन उसके मन में मेरे लिए कोई प्यार और सम्मान नहीं है। वो हमेशा किसी और लड़की के लिए मुझे हर्ट करता है।
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मैं अभी ग्रेजुएशन कर रही हूं लेकिन आगे की मेरी जिंदगी में क्या होगा मुझे कुछ पता नहीं, मुझे क्या करना चाहिए, ये भी पता नहीं। शायद दूसरों को खुश रखने के लिए मुझे इसी तरह से घुट-घुट कर जीना होगा। किससे कहूं, अपनी बात, यहां कोई सुननेवाला, समझनेवाला नहीं। क्या करूं?
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