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उसका इंतजार आज भी है और कल भी रहेगा- फैसल की दिल छूनेवाली लव स्टोरी

जब-जब उसका चेहरा मेरे सामने आता है, मैं खुद को नहीं रोक पाता हूँ इसलिए उसकी यादों से दूर जाने के लिए मैंने 2 दिन पहले स्कूल छोड़ दिया। पर मुझे उसका इंतज़ार था, आज भी इंतज़ार है और कल भी रहेगा।

मेरा नाम फैसल है और मै बिहार से हूँ। मै इंग्लिश से ग्रेजुएशन कर रहा हूँ। मेरी फैमिली बैकग्राउंड कमजोर होने की वजह से पार्ट टाइम जॉब करना शुरू किया। एक टीचर के रूप में मैंने एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना शुरू किया। मेरे 2 साल बीत जाने के बाद स्कूल में एक लड़की आई जिसकी फैमिली बैकग्राउंड मुझसे मिलती थी। वो हिंदू थी।

फैसल लव स्टोरी
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शुरुआत में जब वो टीचिंग कर रही थी तो उसकी बहुत गलतियां पकड़ी जा रही थी जिसपे स्कूल के द्वारा काफी एक्शन लिया जाता था जो मुझसे बर्दाश्त नहीं हो पाता था क्योंकि मुझे लगता था कि जिसकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो, वो लड़की एक काम को छोड़कर कहाँ जायेगी।

फिर मुझे उसकी गलतियां सुधारने की जिम्मेवारी दी गयी। शुरुआत में वो कुछ भी शेयर नहीं करती थी पर जब मैंने समझाया कि गलती करती हो तो समाधान भी निकालना होगा तो फिर वो खुलकर अपनी प्रॉब्लम पर बात करने लगी।
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धीरे-धीरे ये सिलसिला एक साल तक चला और फिर वो स्कूल की बेस्ट टीचर अवार्ड हासिल कर ली। उसने अपने ख़ुशी का इजहार अपने प्यार के साथ किया, उस वक़्त तो मैंने इनकार कर दिया पर उसके साथ बिताया हुआ वक़्त याद आने लगा।

मै चाहकर भी उसके प्यार को एक्सेप्ट नहीं कर पाया क्योंकि हम दोनों के दरम्यान मजहब आ गया। वो हिंदू थी और मैं मुस्लिम। मैं इस कड़वी हकीकत को भूला नहीं था। इसी तरह फिर 6-7 महीने गुज़र गए और हम दोनों की बातचीत बंद हो गयी।
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फिर अचानक एक दिन मेरे फ़ोन पे एक अनजान नंबर से कॉल आया, जब मैंने रिसीव किया तो उसने मुझसे अनजान बनने की कोशिश की पर मै आवाज़ पहचान गया। मैंने उसे फ़ोन करने से मना किया पर जब वो ज़िद करने लगी तो फिर मैं मान गया।

इस तरह से हमारी बातों का सिलसिला शुरू हुआ और हमलोग देर रात तक बात करने लगे। कुछ दिन बीत जाने के बाद उसने फिर मुझे प्रपोज़ किया तो मैंने इस बार उसको मना नहीं कर पाया।
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कुछ दिनों तक सबकुछ अच्छा चला पर एक दिन अचानक वो फ़ोन पर कहने लगी कि मैं अब फिर कभी बात नहीं करुँगी जिससे मैं काफी घबरा गया। जब मैंने मामला जानना चाहा तो उसने बताया कि वो फैमिली से डरती है और अपने फैमिली के खिलाफ नहीं जा सकती।

मैंने भी उससे कहा कि फैमिली के खिलाफ जाने की कोई जरूरत नहीं है, हम दोनों खुद इस मसले का हल निकालेंगे। उस दिन से उसने बात करनी बंद ही कर दी और मै भी उसे फ़ोन नहीं करता था ताकि उसकी फैमिली को मालूम न हो सके। मैने हर कदम पर उसे बचाने की कोशिश की।
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इस तरह फिर कुछ दिन बीत गए। एक दिन फिर कॉल आया और वो माफ़ी मांगने लगी, फिर मैंने सबकुछ ठीक कर लिया। रिश्ता कुछ दिन चला फिर कुछ दिन बात होने के बाद वो कहने लगी कि मैं तुमसे आखिरी बार बात कर रही हूं, इसके बाद हम दोनों की कभी बात नहीं होगी। वो गुस्सा करने के बाद भी फ़ोन करती थी या फिर एक मैसेज कर देती थी।
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अब हमारी बातचीत बंद है। 4 महीने हो गए हैं। स्कूल में वो मेरी तरफ देखती भी नहीं है, मैं इंतज़ार करता रह गया पर मेरे इंतज़ार का फल अब तक नहीं मिला जिसका मुझे मलाल है। मैंने उससे स्कूल में बहुत बार बात करने की कोशिश की पर सब नाकाम हो गया।

जब-जब उसका चेहरा मेरे सामने आता है, मैं खुद को नहीं रोक पाता हूँ इसलिए उसकी यादों से दूर जाने के लिए मैंने 2 दिन पहले स्कूल छोड़ दिया। पर मुझे उसका इंतज़ार था, आज भी इंतज़ार है और कल भी रहेगा।

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