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मैं पति के जुल्मों का शिकार हूं और बच्चों की खातिर प्रेमी के पास जा नहीं सकती – रूपा की लव स्टोरी

मेरा नाम रूपा है। मैं गुवाहाटी से हूं। हम चार बहनें हैं और मैं सबसे बड़ी। 10 साल होते-होते मेरे पापा दुनिया छोड़ गए। उसके बाद दो साल बहुत मुसीबतों से गुजरने के बाद मैंने पढ़ाई छोड़ दी। बस सातवीं तक पढ़ी। 12 साल की थी तब पीसीओ में बहुत कम पैसे में काम शुरू किया और मेरी मां भी लोगों को घर में काम करती थी फिर भी हमारा गुजारा नहीं होता था।

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हम दो दो दिनों तक भूखे सो जाया करते थे। ऐसे ही दिन गुजरे और मैं 15 साल की हुई तो सबको लगा कि मैं बोझ हूं तो उसी उम्र में मेरी शादी एक छोटे-मोटे बिजनेसमैन से करा दी गई। मुझे भी लगा कि मेरा पति शायद मेरे परिवार का सहारा बनेगा, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। मैंने मायके में भी दुख देखे और ससुराल में तो जिंदगी मौत से बदतर हो गई।
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20 साल की होते-होते मैं तीन बच्चों की मां बन गई। खेलने की उम्र में मैं बच्चे पाल रही थी पर फिर भी कुछ ठीक होता अगर मेरा पति अच्छा होता लेकिन वो इनसान कहलाने लायक नहीं है। मेरे सामने धीरे-धीरे उसकी असलियत सामने आने लगी। उसमें बस हवस है और मेरे साथ मारपीट भी करता। किसी से बात तक नहीं करने देता, दूसरों का नाम जोड़कर मुझे गंदी गालियां देता।
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किसी लड़की या औरत से भी बात करूं तो घर से निकालकर गेट में ताला लगा देता था और मैं सबकुछ सहती थी। हमेशा अपने किस्मत को कोसती थी। आज भी कोसती हूं। 2013 में मैं मोबाइल यूज करने लगी तो फेसबुक पर टाइमपास करती थी। तभी फेसबुक पर एक लड़का मेरी जिंदगी में आया। वो कतर में जॉब करता है और नेपाल का है। उसको पता था कि मैं शादीशुदा और तीन बच्चों की मां हूं पर फिर भी बात करते करते मुझसे प्यार करने लगा।
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वो बहुत अच्छा है और वो मेरी जिंदगी में ऐसे है जैसे अंधेरे में कोई रोशनी का दीया हो। आज भी मैं बहुत कुछ सहती हूं पर अब मुझे फर्क नहीं पड़ता। अब तो मेरी बड़ी बेटी 16 साल की है जो मुझे हिम्मत देती है। वो अपने बाप के जुल्मों को देखकर हमेशा बोलती है कि मां तुम चली जाओ अंकल के साथ, पर मैं अपने दोनों बेटियों को ऐसे गंदे इनसान के भरोसे छोड़कर जा नहीं सकती।
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वो लड़का हमेशा मेरी बेटियों को अपनी बेटी बोलता है और कहता है कि तुम आ जाओ मेरे पास दोनों को लेकर। वो मेरी बहुत केयर करता है और बहुत प्यार करता है। हर कदम पर मेरा साथ देता है। वो मुझे हर रिश्ते का प्यार देता है। कभी पापा जैसे बिहेव करता है तो कभी पति के जैसा केयर भी करता है, कभी मेरे बच्चे जैसा जिद्दी बन जाता है।
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मैंने इतना ज्यादा प्यार कभी किसी से नहीं पाया, वो तो जैसे मेरे लिए ही जीता है। कभी कभी तो दिल करता है कि चली जाऊं उसके पास पर फिर ये सोचने लगती हूं कि समाज क्या कहेगा, वो तो मुझे अपना लेगा लेकिन उनके घरवाले कैसे अपनाएंगे और जिस इनसान को मैं भगवान मानती हूं, उसको बदनाम कैसे होने दूं।
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मुझे उससे प्यार बहुत मिला, 2016 में वो कतर से नेपाल आया था तो मुझसे मिलने भी आया था। मेरे हसबैंड कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर गए थे तो उससे मिली थी। मैंने उसे मिलने के लिए बुलाया था। उसने कहा कि मैं तुमको जीवनसाथी मानता हूं और तुम्हारा साथ नहीं छोड़ूंगा। वो फिर कतर चला गया और मैं रोज उससे चैट पर बात करती हूं, जब मौका मिलता है तो हम कॉल पर भी बात करते हैं।
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मैं हमेशा बेचैन रहती हूं ये सोचकर कि ऐसा लगता है जैसे मैं उसकी जिंदगी बर्बाद कर रही हूं पर ये भी सच है कि मैं उससे बहुत प्यार करती हूं। मैंने अपनी जिंदगी में कभी खुशी नहीं देखी, उसके आने के बाद मैं जान सकी हूं कि खुशी क्या चीज होती है। मैं उसको कोई दुख नहीं दे सकती और न ये चाहती हूं कि मेरी वजह से वो अपनी फैमिली से दूर हो जाए।
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मेरा पति बहुत कमीना है। अगर मैं उसके कारनामों को दुनिया के सामने रख दूं तो सब थूकेंगे उस पर लेकिन इससे क्या हासिल होगा, उलटा बच्चों के सामने बाप की पोल खुल जाएगी। मैं कभी कभी सोचकर पागल हो जाती हूं कि मैं क्या करूं? कब तक सहूं ये सब? आज भी मुझपर जुल्म होते हैं, सब बोलते हैं कि पुलिस में जाओ पर उससे क्या होगा, बच्चों का बंटवारा हो जाएगा और मैं पढ़ी लिखी नहीं हूं कि कहीं पर काम कर बच्चों को पढ़ा लिखा कर कुछ बना सकूं।
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बस ये सोचती हूं कि मेरे बच्चे मेरी जैसी जिंदगी ना जिएं इसलिए इतना सहती हूं। मरने की कोशिश भी कर चुकी हूं पर मौत को भी कबूल नहीं हूं और मर भी गई तो बेटियों की जिंदगी नर्क हो जाएगी। मर गयी तो वो भी नहीं जी पाएगा जिससे मैं प्यार करती हूं, इसलिए जीना पड़ रहा है।
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मैं कभी कभी बहुत परेशान होती हूं कि क्या करूं, क्या नहीं। लाइफ नर्क से भी बदतर है, जिंदगी से अच्छी मौत होगी मेरे लिए पर मैं ये सोचकर रुक जाती हूं कि मेरी बेटियों का क्या होगा मेरे बाद। कल रात भी मेरे पति ने मुझे पीटा, आज दोपहर को भी झगड़ा हुआ। शाम को ऐसा लगा कि कुछ कर लूं लेकिन सामने सो रही बेटी को देखकर कलेज फट जाता है कि क्या करूं?

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