sharmila life story

मेरी शादी छोटी उम्र में हुई, मैंने एक बर्बाद जिंदगी को मेहनत से संवारा- शर्मीला की मैरिज स्टोरी

मैं गुजरात से शर्मीला हूं। मेरी सगाई छोटी उम्र में 2002 में कर दी गई थी। उस समय मैं बस सोलह साल की थी। ससुराल में हर कोई ये सोचता था कि मैं छोटी हूं, बहू हूं इसलिए पूरे घर का काम मुझे ही करना पड़ता था। सुबह पांच बजे से लेकर रात को दस बजे तक। कोई ऐसा नहीं था जो मुझे समझे।

मैं भी नादान थी, अकेले में रो लेती थी। मेरी तीन ननद और दो देवर थे। छोटा देवर नीयत का खराब था। वो रात को मेरे कमरे में आता था और जबर्दस्ती छूता था। मैं पति को जगाती थी तो वो भाग जाता था।
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वॉशरूम का रास्ता हमारे कमरे से होकर जाता था। बेडरूम सिस्टम वाला घर नहीं था। पहले हॉल था जिसमें घर के बाकी लोग सोते थे, उससे जुड़ा एक कमरा था जिसमें मैं सोती थी, उसके बाद वॉशरूम था। मेरे ससुर को शुगर की बीमारी थी इसलिए वो बार-बार पेशाब के लिए वॉशरूम जाते थे तो सास ने कमरा बंद करने से मना किया था इसलिए देवर रात में मौका पाकर घुस जाता था। मेरे ऊपर बहुत बंदिशें थी, मर्यादा और घूंघट में रहती थी। मैंने अपने पति को बोला कि छोटा देवर रात को आता है मगर वो डरपोक थे, कुछ नहीं बोले।

मेरा देवर मुझको धमकी भी देता था कि तुम किसी से कहोगी तो तुम्हारा यकीन कोई नहीं करेगा। मैंने फिर पति से कहा कि आप कुछ क्यों नहीं कहते मगर उन्होंने कुछ नहीं कहा। फिर मैंने अपनी सास को बोला कि छोटा देवर कमरे में आता है, मुझे अलग रहना है नहीं तो मुझे मायके भेज दो।

तब मेरी सास बोली कि तू ही गंदी है, मेरा लड़का गलत नहीं। मैंने कहा कि ठीक है तो मैं ही ऐसी हूं तो मुझे अलग रहना है। मेरा पति कुछ नहीं बोला। जो अपनी पत्नी की इज्जत की परवाह नहीं करता वो लाइफ में क्या करेगा। मैं बहुत रोती थी। पूरी रात रोती रहती थी। मेरा पति मुझे नहीं समझता तो कौन समझेगा।

उसी समय मेरे देवर का किसी के साथ अफेयर था तो बवाल हुआ। बहुत सारे लोग देवर को पीटने के लिए आए थे तब मैंने सास से कहा था कि देख लो अपने लड़के की अच्छाई, तभी तो पिटाई हुई। मैं पति के साथ किसी तरह से अलग हो गई। मैंने पति से अलग होने को कहा था तो उन्होंने कहा कि मकान नहीं है, कहां से खोजूं तुम खोज लो तो मैंने किराए का मकान खोजा। अब मेरा परिवार है, जिसमें मेरे पति और दो बच्चे हैं। जब मैं अलग हुई तो मेरा पति कुछ भी कमाता नहीं था, पहले भी नहीं कमाता था और आज भी नहीं कमाता। मेरा पति कभी मेरा अपना हुआ ही नहीं। मैंने बहुत मेहनत की और जीरो से शुरू कर आज मैं बिजनेस करती हूं।

जब अलग हुई थी तब ससुराल से ज्यादा कुछ नहीं मिला था। चार पांच बर्तन बस। जिस घर में गई वहां मैंने घर का खर्चा उठाया, बच्चों की फीस, घर का राशनपानी से लेकर सबकुछ। कहते हैं कि पेड़ मजबूत होता है तो डाली को कभी कुछ नहीं होता, यहां तो मेरा पति ही खोखला था।

मैंने पहले कामवाली बाई का काम दो घरों से शुरू किया। सुबह को 8 से 11 बजे तक दूसरे घरों में काम करती फिर अपने घर का काम करने आ जाती थी। वहां से फुरसत मिलती तो सिलाई-कढाई सीखती थी और शाम में चार बजे से सात बजे तक सब्जी बेचती थी। इसके बाद पुरानी साड़ी बेचने लगी। फिर पैसे बचाकर 5000 रुपए में शादी के नए माल लाकर काम शुरू किया। फिर धीरे-धीरे मैंने कपड़ों और सिलाई की दुकान खोली। फिर शादियों के ड्रेस सिलने लगीं, लैगिंग, कुर्ती और भी कपड़े सिलने लगी तो मेरा काम चल पड़ा। आज मेरे पास अच्छी आमदनी है और परिवार चलाती हूं। अब मैंने अपना मकान भी ले लिया है।

मैंने खूब मेहनत की और घर का खर्चा-पानी निकला ताकि मेरी लाइफ खराब हुई तो हुई, मेरे बच्चों की लाइफ खराब न हो। मेरे पति ने एक पैसा भी नहीं कमाया। मेरे बच्चे मेरे जीने का सहारा हैं। बाकी मेरी जिंदगी में कुछ और है भी नहीं। मैं ये कहना चाहती हूं कि हम लड़कियां कमजोर नहीं हैं, हर मोड़ पर चलना जानते हैं, चाहे कोई भी बड़ी मुसीबत आए, हम हिम्मत नहीं हारते क्योंकि अच्छे लोगों के साथ कोई नहीं तो भगवान खड़ा होता है।

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