rohit love story

मैं दहेज विरोधी हूं लेकिन पापा कहते हैं कि इज्जत का सवाल है – रोहित की मैरिज स्टोरी

मैं महाराष्ट्र से रोहित हूं। मेरी सगाई हो चुकी है। दीवाली के बाद शादी भी फिक्स हो गई है। मुझ पर तीन साल से शादी के लिए दबाव डाल रहे थे क्योंकि मां बीमार रहती थी। मैं पढ़ रहा था। बोल देता था कि पहले जॉब फिर शादी करुंगा क्योंकि मेरे मन में था कि दहेज नहीं लेना है। अगर मैंने बिना जॉब शादी की तो मेरी ये बात कोई नहीं माानेगा।

जब मेरी जॉब लगी तो रिश्ते आने लगे। मैंने पहले घरवालों के सामने दहेज न लेने की बात रखी। सब मान गए लेकिन पापा नहीं माने। बोले कि समाज ऐसा ही है कि दहेज लेना ही पड़ेगा। मैंने बहुत कहा लेकिन नहीं माने और कोई पापा से ऊपर जाके मेरे को सपोर्ट भी नहीं कर सकता था।
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फिर मैंने अपने दोस्तों की राय ली तो बोले कि तू अच्छी से अच्छी लड़की देख कर उससे सगाई कर ले। फिर जब मिलो उससे बात करो तो उससे अपने मन की बात बताना और दहेज न देने की बात करना। मुझे दोस्तों की इस राय पर शंका हुई क्योंकि लड़की भी तो पहले किसी बाप की बेटी होती है ना।

मैंने मां की खराब तबियत को देखते हुए सगाई कर ली। ये सोचा कि जॉब लगने तक घरवालों ने मेरी बात मानी तो अब उनके लिए ये भी सही। वैसे भी दुनिया में सबको सभी चीजें मिलती नहीं है ना। फिर पापा ने भी तो बोला कि हम मजबूर हैं नहीं तो हम भी दहेज न लेने में तेरा साथ देते।

पापा ने कहा कि दहेज न लेने के अलावा शादी में जैसा तू चाहेगा, वैसा करेंगे तो मैं सगाई के बाद होने वाली बीवी से बात करने लगा। रिंग सेरेमनी हुई और वहीं पर शादी की डेट फिक्स कर दी गई। मुझे वो सपोर्टिव नेचर की लगी तो मौका पाकर मैंने उसे ये बात बताई तो बोली कि वो बहुत खुश है कि उसका होने वाला पति ऐसी थिंकिंग रखता है।

मैंने कहा कि अपने पिता से बात करो। तब तक उसके पिता दहेज का फर्नीचर बनाने का ऑर्डर दे चुके थे तो जब उसने भी बात की अपने घर पर तो पता चला कि उसके पिता चाहते हैं कि दहेज नहीं देना पड़े लेकिन फिर वही बात… लड़की वाले होकर यह बात वे डायरेक्टली सामने नहीं रख सकते थे।

लड़की के पापा ने कहा कि अगर मेरी साइड से कोई बड़ा आदमी बोल दे तो वो मेरी बात खुशी-खुशी मान लेंगे। अब मेरी साइड से बात करनेवालों में से मेरे पापा है और उनके बारे में मैं पहले ही बता चुका हूं कि वो भी मजबूर हैं। मेरी होने वाली बीवी भी मुझे बोल रही थी कि अगर मैं दहेज नहीं लेता तो भी हमेशा मेरे साथ है, चाहे मैं उसे जिस भी माहौल में रखूं।

वो बोलती है कि उसे कोई सुख सुविधा नहीं चाहिए। अब दहेज का मैटर फिर से मेरे दिल में टीस मार रहा है। वो बोली कि अपने पापा को फिर से बोलो, क्या पता कि वो मान जाए, आखिर वो पापा ही हैं ना। मैंने मन ही मन में सोचा कि मुझे पता है कि वो नहीं मानेंगे। मेरे पास टाइम भी कम है क्योंकि उधर फर्नीचर भी बन रहा है।

अब मैं क्या करूं? मैं अपने फादर को नाराज नहीं करना चाहता क्योंकि उन्होंने मेरी पढ़ाई में हर वक्त मेरा साथ दिया। क्या करूं…मैं बुरी तरह से परेशान हूं?

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