ravi ranjan love story

मैं आज भी खुद को उसका कातिल समझता हूं – रविरंजन की रियल लव स्टोरी

मैं रविरंजन हूं। मेरा बचपन बिहार के एक गांव में बीता। जब मैं दस साल का था तो मुझे पढ़ने के लिए रांची भेजा गया। ये 2005 की बात है। उस समय मुझे लव लाइफ के बारे में कुछ पता नहीं था लेकिन धीरे धीरे ये चीज जान गया जब मुझे भी रागिनी से प्यार हो गया। वो मेरे ही स्कूल में पढ़ती थी। प्यार इस तरह हुआ कि वो पूरी तरह से दिल में बस गई।

हमारे प्यार की शुरुआत दोस्ती से ही हुई। चौथी पांचवीं और छठी क्लास तक एक ही स्कूल में पढ़े फिर दोनों ने स्कूल चेंज कर लिया। मैं अपने घर बिहार आ गया और वो बोकारो चली गई। हम दोनों एक दूसरे के कॉन्टेक्ट में नहीं रहे क्योंकि उस समय हमारे पास मोबाइल नहीं था। दो साल बाद हम दोनों के घर में मोबाइल आया तो हमारी बातें फिर शुरू हुईं।

हम लोग जब नौवीं क्लास में थे तब मैंने उसे प्रपोज किया था और उसने एक्सेप्ट कर लिया। उसने बस एक ही सवाल किया कि तुमने ये तीन वर्ड बोलने में इतना टाइम क्यों लगाया रवि। मैंने कहा कि मुझे डर था कि अगर तुम मुझे प्यार नहीं करती तो तुम जैसी फ्रेंड को मैं खो देता आई लव यू बोलकर, जो मैं नहीं चाहता था। फिर हमारे प्यार का रिश्ता मजबूत हो गया।

ravi ranjan love story

जब मैं दसवीं पास हुआ तो मैं पटना आ गया और वो अभी बोकारो में ही थी। वो पटना आती रहती थी तो हम मिलते थे। 26 फरवरी 2012 की बात है। हमारे बीच किसी बात को लेकर लड़ाई हो गई थी और हमारी बात लगभग न के बराबर होने लगी। उस लड़ाई की वजह से हम दोनों में कभी कभी ही बात हो पाती थी।

सात मार्च को रागिनी ने कॉल किया कि रवि मैं मंदिर जा रही हूं, क्या मांगू भगवान से..तो मैंने गुस्से में बोल दिया कि मांग लेना कि मैं जल्दी मरूं और फोन डिसकनेक्ट करके ऑफ कर दी। मैंने खुद के लिए मौत मांगने बोला था लेकिन उस पगली ने खुद के लिे मांग ली। उसी दिन उसका एक्सीडेंट हुआ था और दो दिन हॉस्पिटल में रहने के बाद वो इस दुनिया को और मुझे हमेशा के लिए छोड़कर चली गई।

उसके बाद मैं बिल्कुल अकेला हो गया और आज पांच साल बाद भी अकेला हूं। बस इस उम्मीद में कि मेरी रागिनी लौट आएगी। उसे गए हुए पांच साल होने को है और आज भी कोई दिन ऐसा नहीं होता कि उसे याद न करूं। मेरी पढ़ाई, हेल्थ सब खत्म हो गई है उसके जाने के बाद क्योंकि मुझे मन ही नहीं लगता कुछ करने में।

मैं उसे आज भी बहुत प्यार करता हूं और उसे बहुत मिस करता हूं। आज भी जब भी कभी भगवान के पास जाता हूं तो बस एक ही दुआ मांगता हूं कि भगवान, मुझे रागिनी लौटा दो। उसके लौटने से ही मेरी हंसी वापस लौटेगी। हम दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करते थे लेकिन शायद भगवान को हमारा रिलेशनशिप पसंद नहीं आया हो।

मैं आज खुद को रागिनी का कातिल समझता हूं। शायद मेरे गुस्से की वजह से ऐसा हुआ। अगर मैं नॉर्मल बात करता उससे तो शायद उसे कुछ नहीं होता। लोगों को यही कहूंगा कि अगर सच्चा प्यार करते हो तो अपने लवर से तो कभी लड़ाई मत करो और अगर हो जाए तो जल्दी से मना लो। रिलेशनशिप में कभी ईगो मत रखना, यही ईगो बर्बाद कर देता है। रिलेशनशिप बचाने के लिए आपको झुकना पड़े तो झुक जाना क्योंकि किसी इनसान को अगर एक बार खो दें तो लाइफ टाइम के लिए खो देते हैं।

Advertisements

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.