nagma love story

मैंने फैमिली को अपने प्यार के बारे में बताया तो वहीं ठोकर खा गई – नगमा की लव स्टोरी

मैं नगमा, यूपी के एक शहर से हूं। मैं एक लड़के से प्यार करती हूं और हम दोनों शादी करना चाहते हैं। वो बिजनेस करता है और सेटल्ड है लेकिन हम दोनों की कास्ट अलग है। मैंने उसके बारे में घर में बताया तो मुझसे कहा गया कि जहां हम तुम्हारी शादी करेंगे वहीं करनी पड़ेगी, उसके बाद तुम खुश रहो या दुखी रहो, उससे हमें कोई मतलब नहीं। मैंने अपनी फीलिंग जैसे ही घरवालों को बताई, पहले कदम पर ही मुझे ठोकर लग गई।

अभी मेरे घर में सिचुएशन ये है कि मेरी बड़ी बहन का तलाक हो चुका है। उसकी शादी दो साल पहले हुई थी। घरवालों ने ही लड़का खोजकर एरेंज मैरिज की थी लेकिन लड़का बाप नहीं बन सकता था। वह इंपोटेंट था। इस धोखे की वजह से मेरी दीदी ने तलाक लिया और अब वह हम लोगों के साथ ही रहती है।

मैं दीदी की हालत देखकर एरेंज मैरिज से डर जाती हूं। जिस लड़के से मैं शादी करना चाहती हूं, उसके घरवाले भी राजी नहीं हैं लेकिन वो घर छोड़ने को तैयार है। मैंने अपने घर में सबको दीदी का वास्ता दिया कि देखो अरेंज मैरिज में क्या हाल हुआ है लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। मैंने अपने घर में जिद की और कहा कि मैं जिसे जानती समझती हूं उसी से शादी करना चाहती हूं ताकि दीदी के साथ जो धोखा हुआ, मेरे साथ न हो।nagma love story

मैंने कहा कि मैं अपनी मर्जी से शादी करके खुश रहूंगी तो घर के लोग कह रहे हैं कि एक तरफ दीदी की वजह से घर की बदनामी पहले से हो रही है और अब मैं और बदनाम करने पर तुली हूं। कह रहे हैं कि तुम्हारी खुशी से हमें कोई मतलब नहीं है। अगर किसी और से शादी करोगी तो हमसे तुम्हारा कोई रिश्ता नहीं रहेगा।

मैं बहुत परेशान रहती हूं। लवर से मेरी रोज बात होती है, कभी-कभी मुलाकात भी होती है लेकिन मेरी रातों की नींद उड़ गई है। मैं बहुत डिप्रेशन में रहती हूं। मेरी मां कहती है कि जाओ, शादी कर लो लेकिन मेरे पापा काफी डेंजर किस्म के इनसान हैं। अगर मैं घर छोड़ कर गई तो वो मेरी मां पर जुल्म करेंगे। मेरी सजा मां को देंगे।

वैसे भी एक बेटी अपने घर और रिश्ते को इतनी आसानी से नहीं छोड़ सकती। मैं चाहती हूं कि घरवालों की मर्जी से सबकुछ हो लेकिन ऐसा पॉसिबल नहीं लग रहा। घरवाले मेरा रिश्ता खोज रहे हैं और मेरे घर की सिचुएशन की वजह मैं कोई कदम नहीं उठा पा रही। घरवालों की मर्जी से कहीं शादी करूंगी तो मैं कभी खुश नहीं रह पाऊंगी, हमेशा गम में रहूंगी। न मैं अपने लवर को जिंदगीभर छोड़ सकती हूं और न ही मैं अपने घर को छोड़ सकती हूं।

मेरा बीएफ कहता है कि घरवालों को राजी करो या जैसा कहो वैसा करूंगा। वो हर हाल में तैयार है लेकिन मैं घरवालों के सामने रो-रो कर हार गई लेकिन कोई नहीं माना। मेरे घरवाले मुझे घर के बाहर जाने से अब रोकने-टोकने लगे हैं। कोई ये क्यों नहीं समझता कि बच्चों की खुशी ही उनके काम आएगी। लड़कियों के साथ ही ऐसा भेदभाव क्यों होता है?

जिससे प्यार करती हूं उससे ज्यादा इज्जत मुझे कोई नहीं दे सकता। उतनी केयर मेरी कोई नहीं कर सकता। वो भी डिप्रेशन में रहते हैं और मैं भी। मेरी मोहब्बत मुझे ऐसे मोड़ पर ले आई है कि क्या करूं, ऐसे सिचुएशन में कुछ समझ नहीं आता…आप लोग बताइए क्या करना चाहिए?

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