soniya real love story

पैरेंट्स की इज्जत और खुशी की खातिर एक दूसरे से शादी नहीं कर सकते – सोनिया की लव स्टोरी

मैं सोनिया हूं। हरियाणा से हूं और मैं एक लड़के से बहुत प्यार करती हूं। मैं सिख हूं और वो हिंदू है। हम तीन साल से एक दूसरे के प्यार में हैं। आज हमारा रिलेशनशिप बहुत ही मजबूत हो चुका है पर सबकी तरह हमारी लव स्टोरी में भी बहुत प्रॉब्ल्म्स हैं। हम इंटर कास्ट हैं और हमारी शादी नहीं हो सकती, ये हम दोनों को ही पता था क्योंकि हमारे पैरे्ट्स हमारे रिश्ते की बात कभी नहीं मानेंगे।

फिर भी एक ख्वाहिश तो होती है कि उम्रभर के लिए एक दूजे के हो जाएं। वही हम दोनों के मन में भी है पर हम घर वालों का ट्रस्ट भी नहीं तोड़ना चाहते हैं। उस पर भी बहुत जिम्मेदारियां हैं और वो अपनी दोनों बहनों से बड़ा है और उन बहनों की शादी और जॉब को लेकर भी बहुत टेंशन में रहता है।

जैसे जैसे समय बीतता जा रहा है, हमारा प्यार और भी गहरा होता जा रहा है। हमारा रिलेशन बहुत स्ट्रॉन्ग हो गया है लेकिन इसी बीच मेरे घर वालों ने मेरे लिए लड़का खोजना शुरू कर दिया और उन्हें जैसा लड़का मेरे लिए चाहिए था, वो मिल गया। जब मुझसे पूछा तो मैंने टाल दिया कि मुझे अभी शादी नहीं करनी है और ऐसा ही तीन साल से कहती आ रही हूं। मेरी मां इंटरकास्ट शादी के सख्त खिलाफ है।
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मैंने पापा को मना भी लिया कि पापा मुझे वहां नहीं करनी शादी लेकिन मां ने मुझे इमोशनली ब्लैकमेल किया और न जाने क्या-क्या बोला तो मैंने उन्हें हां कर दी और कहा कि जो करना है करो लेकिन मुझे इन सबमें कोई इंट्रेस्ट नहीं है। लड़के वालों से बात हो गई और रिश्ता पक्का हो गया।

जब ये सब हुआ तब मैं चंडीगढ़ में नेट की कोचिंग ले रही थी और मेरा लवर भी वहीं रहता था, वो एसएससी की कोचिंग ले रहा था। मैंने उसको सब बताया तो बुरी तरह रोने लगी। उसको भी बहुत दुख हुआ और मुझे समझाते हुए बोला कि ये सब होना ही था, हम कल के लिए अपना आज क्यों बर्बाद करें। मुझे कहने लगा कि हम अलग कहां हो रहे हैं, ऐसा कभी नहीं होगा, हम एक दूजे का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे।

कई बार हम दोनों सोचते हैं कि चलो कोर्ट मैरिज कर लें लेकिन पैरेंट्स का ख्याल आते ही सोचते हैं कि हम ऐसा कैसे कर सकते हैं, वो इतना पैसा लगाकर हमें पढ़ा रहे हैं और कितना विश्वास होता है उन मां-बाप का जो बच्चों को बाहर भेजते हैं, पढ़ने के लिए।

हम अपने लिए नहीं जी सकते। हमें पैरेट्स के लिए जीना है। हम दोनों एक दूसरे को हौसला देते हैं लेकिन कभी कभी बुरी तरह टूट जाते हैं और सच में उसके बिना मुझे रहना नहीं आता और न  ही मुझे रहना है लेकिन पैरेंट्स को भी धोखा नहीं दे सकते और उनकी मर्जी से शादी भी करनी होगी।

जिस लड़के से मेरा रिश्ता हुआ है, मैं उससे बात नहीं करती थी लेकिन एक दिन उस लड़के की भाभी ने फोन करके मेरी बात करा दी और मैंने जैसे-तैसे दो मिनट बात तो कर ली लेकिन फिर मैं बहुत रोई कि मैं अपने प्यार के साथ धोखा कर रही हूं। जब मैंने उसे ये बात बताई तो वो भी बहुत रोया था उस दिन।

जिस लड़के के साथ मेरी शादी हो रही है मैं उससे बात नहीं करना चाहती क्योंकि मैं न तो उसके साथ धोखा कर सकती हूं और न ही अपने प्यार के साथ। मेरा लवर बोलता है कि कभी कभी बात कर लिया करो यार, उसकी भी ख्वाहिशों होंगी। मैं कभी कभी अपने होने वाले हसबैंड से बात तो कर लेती हूं लेकिन उसके बाद मुझे बहुत तकलीफ होती है। मेरी अंतरआत्मा सोचती है कि मैं कहीं अपने प्यार के साथ धोखा तो नहीं कर रही हूं। यह सब सोचकर मेरा दिमाग बहुत खराब हो जाता है।

हम दोनों ने डिसाइड किया है कि हम एक दूजे का साथ लाइफ के किसी भी स्टेज पर कभी नहीं छोड़ेंगे। हम दोनों की शादी नहीं हो पाएगी तो मैं सोचती हूं कि जब हम रिलेशन में रहेंगे तो क्या उनके साथ धोखा नहीं करेंगे जिनसे हम दोनों की शादी होगी।

हम एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते। बहुत प्यार करते हैं और बस हम सिर्फ अपने पैरेंट्स की इज्जत और खुशी की खातिर एक दूसरे से शादी नहीं कर सकते। क्या हम लाइफ टाइम एक दूसरे से रिलेशन रख सकते हैं? हम दोनों प्यार को अपने मां-बाप के प्रति फर्जों से बड़ा नहीं कर सकते। अपने प्यार को कुर्बान करके हम गलत तो नहीं कर रहे?

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