aashtha jazbat1

जज्बात पेज से मुझे हिम्मत मिली और मैंने लवर से शादी की

जज्बात शायद वो भावनायें जो मन में छुपी होती हैं और बयां होती हैं कहीं ऐसी जगह जहां दिल कहता है कि कोई होगा हम जैसा, जो समझे वो सब और उन बातों के मायने जो हम कहना चाहते हैं। मेरे लिये तो बस इस जज्बात पेज के मायने हिम्मत, उम्मीद, आशा और चाह… यहां की हर कहानी एक नहीं बार-बार पढ़ी है। इन कहानियों से अजीब सी हिम्मत मिलती है, एक आवाज आती है दिल से कि अपने प्यार का साथ निभाना है।

ये हिम्मत इस पेज की कहानियों से ही आयी है कि दिनभर सोच में रहती थी कि कितने दिल हैं, हजारों टूटे हुए, समझौते किये हुए और आज भी प्यार की यादों में लिपटे हुए, बहुत दर्द होता है जब हम एक पल को कमजोर होकर सोच लेते है कि परिवार के लिए हम छोड़ देंगे उसे… अपनी खुशी अपने प्यार अपनी जिंदगी अपनी हर खुशी हम अपनों के लिए छोड़ देंगे लेकिन अजीब है ना जब हम एक तरफ हम सोच रहे होते हैं तो दूसरी तरफ हमारे घर वाले हमें गलत समझ कर आपस में बातें करने लगते हैं। जबर्दस्ती शादी करा देते हैं और उसके बाद बेटी आत्महत्या भी कर ले तो कौन सी बड़ी बात है?

हम जब उनको कहते हैं कि हमें किसी से प्यार है तो हमारे रिश्तेदारों को सबको बता दिया जाता है कि ये तो ऐसी है, इसने ऐसा किया है और वह एक पल में आकर हमें कहने लगते हैं कि कहां मुंह काला किया, कितनों के साथ किया, रोज कॉलेज तभी तो जाती है। और हम यह सब सुनकर जहर का घूंट पीकर वहीं अंदर से मर कर रह जाते हैं। फिर भी समाज कहता है कि मां-बाप के खिलाफ नहीं जाना चाहिए, वह हमेशा सही होते हैं…. कहा जाता है कि वो गलत ना बोल सकते है, ना कर सकते हैं तो जो लड़की कल तक संस्कारी होती है और अगले पल चरित्रहीन हो जाती है, जिसकी दुनिया एक पल में बदल जाती है, वो सब समाज में सही होता है क्या?
aashtha jazbat1
कुछ लड़कियां होती हैं जिनमें बहुत हिम्मत होती है। इतना कुछ सुनने के बाद पाबंदियों के बाद वह फिर भी अपने प्यार को छोड़कर मां-बाप की मर्जी से शादी करती है और सोचती है कि शायद वो यकीन वह प्यार कभी वापस मिल सके पर ऐसा कभी नहीं होता। शादी के बाद शायद मां बाप को लगता है कि उनकी जिम्मेदारी पूरी हो गई। उनकी बेटी भूल चुकी है अपना प्यार, अपना अतीत पर वह एक सच से अनजान रहते हैं कि हम कभी वो भूल ही नहीं पाते, छोड़ नहीं पाते हैं, वजह ही नहीं होती उसे छोड़ने और भूलने की। जब वो प्यार वापस हम पा ही नहीं पाते तब लगता है कि हमने ये मजबूरी के रिश्ते जोड़े क्यों?

मां-पापा आखिर समझ क्यों नही पाते कि ज़बर्दस्ती और मर्जी में कितना फर्क होता है… हम जहां मर्जी से जाते हैं और जहां मजबूरी में…वहां जमीन आसमान का फर्क होता है। हमसे गलती हो, पति बुरा हो, ससुराल में गलत बर्ताव हो तो इसके ज़िमेदार हम ही होते हैं। सब हमें गलत कहते हैं, क्यों? क्योंकि हमने कभी परिवार को अपने प्यार से शादी की बात कही होती है और तबसे फिर कभी हम सहीं बन ही नहीं पाते, सही होकर भी बेइज्जत होते रहते हैं।

इतना कुछ देख चुकी हूं और बहुत कुछ अनुभव भी कि जब परिवार एक पल में हमें पराया कर देता है तो फिर जो लोग भागकर एक दूसरे को चुनते हैं और धीरे-धीरे जब ठीक कर देते हैं, वो लोग काफी हद तक सही ही करते हैं क्योंकि धीरे धीरे सब ठीक हो जाता है पर जहां मजबूरी के रिश्ते से बंध जाते हैं वहां कोई उम्मीद नहीं होती कि हम अपना प्यार पा लेंगे, खुश रहेंगे। ये सोच तब किसी काम की नहीं होती क्योंकि बहुत देर हो चुकी होती है। एक पल के लिए हम जिनके लिए अपनी खुशियां छोड़ने की सोच भी लेते हैं वही परिवार क्यों नहीं एक बार हमारी पसन्द से मिलने को राजी नहीं होता? क्यों हमें वेश्या कह दिया जाता है? जब हम उनके लिए अपनी खुशी छोड़ने को तैयार रहते हैं तो वो भी एक बार हमें समझने की कोशिश क्यों नहीं कर सकते… आखिर क्यों?

यहां पहाड़ो में अक्सर यही होता है कि लड़की की पसंद नहीं, लड़के की जॉब देखी जाती है, सरकारी है तो लाखों बुराई भी मंजूर है पर लड़क़ी जिससे प्यार करती है, वो मंजूर नहीं है चाहे वो लड़का सच में लाखों में एक हो, कोई बुराई ना हो पर लड़की की पसंद है ना.. तो वो परिवार की नजर में बुरी ही होती है। लड़का कम और परिवार ज़्यादा देखा जाता है, सब सरकारी नौकरी मैं हैं तो लड़का शराबी भी अच्छा है… वाह, है ना कमाल की बात, क्या सोच है मां-बाप की।

लड़कियों को इतना आत्मनिर्भर बनाया ही नहीं जाता, पढ़ाया ही नहीं जाता कि वो अपने साथ हो रहे अत्याचारों से मुक्त हो खुद के पैरों पर खड़ी हो। मायका तो कबका पराया हो जाता है और ससुराल कभी अपना नहीं पाता हमें…तो हमारा घर कौन सा होता है?

बस इतना ही कहूंगी थक हार कर
पल में हंसाती है पल में रुलाती है
यह जिंदगी है साहब हर रंग दिखाती है
छोटी सी खुशी को बड़ा कर जाती है
हंसते हंसते कितना रुला जाती है
यह किस्से तजुर्बे हैं साहब
जो जिंदगी ही दे जाती है

मैं तो अपने प्यार से इतना ही कहना चाहूंगी कि जब सबकी नजरों मैं गलत थी, बस तुम थे साथ हमारे। सपने मैं भूलने चली थी.. तुम ने कहा भरोसा रखो, साथ दूंगा, सब ठीक कर दूंगा। आज मैं सबकी नफरत सह कर भी खुश हूं, वजह तुम हो। मैं तुम्हारा साथ कभी नही छोडूंगी। बस तुम्हारे साथ मिल कर सब ठीक कर दूँगी और सब ठीक नहीं भी हुआ तो मैं तो वैसे भी मर चुकी हूं इन चारदीवारी में कैद सी, जहां प्यार अपनापन ही नहीं, बस नफरत है सबके मन में आज मेरे लिए।

पता नहीं लोग कहां से इतनी हिम्मत लाते हैं कि मजबूरियों में कहीं और रिश्ते बांध लेते हैं। मैं उन लोगों में शामिल नहीं होना चाहती, जो हार जाते हैं, तुम मुझे हारने भी मत देना, सबकी नफरत सह कर खुश रहूंगी, बस तुम साथ देना। हम एक दिन मिल कर सब ठीक कर देंगे।

थैंक्यू जज्बात.. हिम्मत हौसला आशा उम्मीद के लिए… बहुत खास हैं यहां की कहानियां… मेरे लिए जिनसे हिम्मत मिलती है।

आस्था

Advertisements

कमेंट्स यहां लिखें-

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.