sadhna story

ब्यूटी कॉन्टेस्ट जीतने से साधना के घरवाले खफा हो गए – पिंजड़े की मुनिया बनी साधना

साधना यूपी के एक शहर की रहने वाली है। 23 साल की साधना का सपना है कि वो जिंदगी में कुछ करे, वो आसमान में बहुत ऊंची उड़ान भरना चाहती है लेकिन आज वो एक कमरे में कैद कर दी गई है। घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी गई है, वजह जानकर कई लोगों को यकीन नहीं होगा कि हमारे समाज की बेटियों के साथ मां-बाप भाई क्या-क्या सुलूक करते हैं।

साधना ग्रेजुएशन कर चुकी है। दो महिने पहले तक उसे शहर में कहीं भी आने-जाने की छूट थी लेकिन अचानक कुछ ऐसा हुआ जिसने साधना को पिंजरे वाली मुनिया बना दिया। पिंजरे वाली मुनिया का मतलब तो आप समझते होंगे, एक बेटी जिसे सिस्टम के पिंजरे में रखा जाता है, जिसके आजाद अहसासों पर पहरे बिठाए जाते हैं।
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दो महिने पहले साधना ने अपने शहर के ब्यूटी कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया और वो मिस सिटी चुनी गई। उसके सिर पर सबके सामने ताज रखा गया तो उसका आत्मविश्वास शिखर पर था लेकिन जैसे ही वो ताज पहनकर घर लौटी तो उसका सामना ऐसी बातों से हुआ जिससे उसका खुद पर से यकीन डोल गया। शहरभर में उसकी खूबसूरती के चर्चे हो रहे थे, अखबारों के पेज पर उसकी तस्वीरें छपी थीं तो लोग बातें भी कर रहे थे और यही बातें उसके भाई और पिता को चुभ रही थी।

साधना जैसे ही घर लौटी तो भाई और पिता ने उसको सजने संवरने से सख्त मना कर दिया और कह दिया कि हद में रहो, तुम्हारी शादी होगी इसलिए अब तुम मॉडलिंग या ब्यूटी कॉन्टेस्ट जैसी चीजों से दूर रहोगी। साधना ने विरोध किया लेकिन घरवालों के सामने उसकी एक नहीं चली। साधना ने घरवालों से कहा कि मैं आगे पढ़ना चाहती हूं, मुझे बाहर जाने दो लेकिन घरवालों ने मना कर दिया।

साधना अब अपनी मनपसंद लिपस्टिक नहीं लगा सकती क्योंकि देखकर पापा भड़क जाते हैं। उसकी हर पसंद अब पिता और भाई को खटकती है। उसकी शादी के लिए लड़के की तलाश हो रही है। साधना जानती है कि पिता और भाई ने, इस सिस्टम ने उसकी तकदीर लिख दी है और इसके आगे वह कुछ नहीं कर सकती, बेबस और मजबूर है।

वो इसी बेबसी में अपने घर में रोज जागती और सोती है। उसका भविष्य पहले पिता और भाई ने लिखा, आगे कोई पति लिखेगा जो न जाने कैसा होगा…और फिर साधना के सारे सपनों के फूल धीरे-धीरे मुरझा रहे हैं और उन मुरझाते फूलों के देखकर वो समझौते की जिंदगी जीने की तरफ धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। वो इसी आस पर अब आगे जी रही है कि शहनाई की आवाज के साथ ही अब वो इस पिंजरे से निकलेगी…

सबसे बड़ा सवाल यही है कि ऐसे माहौल में जीने वाली साधना क्या करे जिससे वो अपनी तकदीर खुद लिखे, जिंदगी अपनी शर्तों पर जीने के लायक बने? हमारे समाज में ऐसी एक साधना नहीं, कई साधना हैं जो इसी तरह पिंजरे वाली मुनिया बना दी गई है।

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