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जज्बात फेसबुक पेज की वजह से प्रेमी जोड़े की शादी हुई

शगुफ्ता की कहानी पोस्ट हुई थी जिसमें उसने कहा कि इस पेज की वजह से उसकी जिंदगी में खुशी और प्यार आया। आपको यह जानकर खुशी होगी कि इस पेज की वजह से दो प्रेमी जोड़ों की शादियां भी हुई हैं। इस पेज को शुरू हुए बहुत ज्यादा दिन नहीं हुए हैं लेकिन कई रीडर्स मुझे ये लिखते हैं कि इस पेज की वजह से उनकी जिंदगी बेहतर हुई या दर्द कम हुआ। यह पोस्ट उन दो शादियों के बारे में है जिसके पीछे यह पेज है।

करीब 6 महीने पहले की बात है। इस पेज की एक फॉलोअर यूपी के एक शहर में ब्यूटी पार्लर चलाती थी। शादियों के समय उसके ब्यूटी पार्लर में दुल्हनें भी आती थीं। उससे कभी-कभी बात होती थी तो मेरी उससे दोस्ती हो गई थी। मैंने उससे कहा था कि उन दुल्हनों की भी प्रेम कहानी होगी, जरा बात करना क्योंकि हमारे समाज में अधिकांश शादियां लड़कियों के मन के खिलाफ की जाती हैं। हलांकि कस्टमर की प्राइवेट लाइफ के बारे में पूछना नहीं चाहिए लेकिन फिर भी बातों-बातों में तो पूछा ही जा सकता है।

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एक दुल्हन जब सजने के लिए आई तो वो कुछ उदास थी। मेरी दोस्त ने उससे पूछा तो वो रो पड़ीं। वो दुल्हन प्रेग्नेंट थी लेकिन उसकी शादी जबर्दस्ती किसी और लड़के से की जा रही थी जबकि उसका लवर उससे शादी करने के लिए तैयार था। मेरी दोस्त ने उसे समझाया कि अगर ये शादी करोगी तो इससे कई जिंदगियां बर्बाद हो जाएंगी। तुम होने वाले पति को धोखा दोगी, तुम और तुम्हारा ब्वॉयफ्रेंड बर्बाद होगा, होने वाले बच्चे की जिंदगी खराब होगी।

मेरी दोस्त के समझाने पर वह दुल्हन ब्यूटी पार्लर से ही अपने लवर के साथ फरार हो गई। इधर उसके घर वाले उसको खोजते-खोजते ब्यूटी पार्लर तक आए लेकिन मेरी दोस्त ने कह दिया कि उसको कुछ नहीं मालूम कि दुल्हन कहां गई। शादी के तीन-चार दिन बाद प्रेमी पति के साथ दुल्हन अपने घर आई तो उसके भाई-पिता दोनों को मारने-पीटने पर उतारू हो गए फिर मां ने बीच-बचाव किया। घरवालों ने बेटी से रिश्ता तोड़ लिया लेकिन इस शादी की वजह से सच में कई जिंदगियां बर्बाद होने से बच गईं।

दूसरी शादी अभी हाल में उत्तराखंड की आस्था ने की। उसने अपने घरवालों की मर्जी के खिलाफ जाकर लवर से शादी की और आज बहुत खुश है। उसके घरवाले उसकी शादी जबर्दस्ती किसी सरकारी नौकरी करने वाले से करना चाहते थे लेकिन आस्था समाज के इन छोटी सोचों के खिलाफ थी। हलांकि उसकी शादी के पीछे उसकी खुद की हिम्मत और सोच है क्योंकि मैं उसे पिछले एक साल से ज्यादा समय से जानता हूं। फिर भी आस्था का कहना है कि इस पेज की वजह से उसके अंदर अपने प्यार को पाने का जज्बा बचा रहा इसलिए मैं भी यह सोचकर खुश होता हूं कि इस पेज ने कहीं न कहीं उसकी मदद की।

जब आस्था से मेरी पहली बार बात हुई थी तो उस समय आधी रात का समय था। आस्था को उसके माता-पिता ने सुबह तक फैसला लेने को कहा था कि या तो हमारी मर्जी से शादी करो या घर छोड़ दो। पैरेंट्स ने ये चेतावनी दी थी कि अगर अपनी मर्जी से शादी करोगी तो तुमसे कोई रिश्ता नहीं रहेगा। उस रात आस्था बहुत परेशान थी और घर में बंद होकर जिंदगी के अंधेरे से जूझ रही थी। मुझसे उसने एफबी पर उसी समय कॉन्टेक्ट किया था। मेरी कोशिश यही रहती है कि चाहे कितनी भी बुरी परिस्थिति हो, इंसान जिंदगी की तरफ देखे और वक्त को भी थोड़ा वक्त दे। एक साल तक परिस्थितियों से जूझने के बाद आस्था ने आखिरकार फैसला ले लिया।

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