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हिमा दास, गोल्ड मेडल जीतो या प्यार करो लेकिन पहले अपनी जाति बताओ?

जात न पूछो साधु की, पूछ लीजियो ज्ञान
मोल करो तरवार की, पड़ा रहन दो म्यान

मतलब, साधु से ज्ञान ले लो, जाति मत पूछो, तलवार का महत्व समझो, म्यान के बारे में जानकर क्या करोगे?

कबीर ने 15वीं शताब्दी में यह दोहा वाकई ऐसे लोगों से उकताकर कहा होगा जो बात-बात में उनकी जाति पूछा करते थे। उस समय गूगल जैसा सर्च इंजन नहीं था, वरना वहां भी लोग कबीर के ज्ञान से पहले उनकी जाति सर्च करते। आज 6 सदी यानी लगभग 600 साल बीत जाने के बाद भी भारतीय वहीं के वहीं हैं। इंसान की उपलब्धियों का महत्व जानने से पहले लोग उस इंसान की जाति जानना चाहते हैं। यही हिमा दास के साथ हुआ।

19 साल की हिमा दास ने विदेश में अंतर्राष्ट्रीय एथलेटिक्स में 400 मीटर की दौड़ में सोना जीता तो अचानक भारतीयों को उसका नाम जानने को मिला। पीटी उषा और मिल्खा सिंह का नाम सुनने के बाद भारतीय यह भूल गए थे कि भविष्य में इस देश से भी दौड़ में कोई दुनिया को टक्कर दे सकता है। हिमा दास रातोंरात स्टार हो गईं। लेकिन ये क्या…भारतीयों ने हिमा दास की जाति के बारे में गूगल में सर्च करना शुरू कर दिया और यह ऑटो सजेशन में सबसे ऊपर आने लगा।

फिर क्या था, सारी दुनिया में भारत का यह पिछड़ा चेहरा उजागर हो गया। क्या ऐसे ही लोगों से भारत एक विकसित राष्ट्र बनेगा जहां भारतीय को सफलता मिलने पर लोग बस उसकी जाति सर्च करना शुरू करेंगे। ऐसा पहली बार नहीं हुआ, इससे पहले भी पीवी सिंधु ने जब रियो ओलंपिक में मेडल जीता था तो उनकी जाति जानने के पीछे लोग गए थे। हिमा दास की जाति सर्च कर भारतीयों ने एक बार फिर पूरी दुनिया में देश को शर्मसार करने वाला काम किया।

जाति देखकर ही प्यार कीजिए?
देश में जाति लोगों के दिल, दिमाग और आत्मा में कैसे बसा है, यह यहां किसी से छिपा नहीं है। जाति से आजादी की भले बात की जाती हो लेकिन ये सिर्फ बात ही हैं। भारत के सोशल सिस्टम में जाति व्यवस्था ने कितनी घुटन पैदा की है यह उनसे पूछिए जो अपनी मर्जी से किसी दूसरी जाति के इंसान को जीवनसाथी के रूप में चुनना चाहते हैं। जज्बात पेज के लिए कई लोगों ने अपने प्यार की ऐसी कहानियां भेजीं जिसमें जाति की वजह से उनका प्यार अधूरा रह गया और अपनी ही जाति के किसी और से शादी करने पर मजबूर होना पड़ा। कहा जाता है कि प्यार ही ऐसी ताकत है जो जाति जैसी खराब व्यवस्था को बदल सकता है इसलिए इस ताकत को कुचलने में व्यवस्था के ठेकेदार पूरी ताकत लगा देते हैं।

पेज के एक पाठक सलाह दे रहे हैं कि हर किसी को कास्ट में लव करना चाहिए क्योंकि इसमें 90 प्रतिशत केस में ऐसा होता है कि मां-बाप भी राजी होते हैं। वे यह भी स्वीकार करते हैं कि हकीकत में यह संभव नहीं है क्योंकि फीलिंग्स पर कोई जोर नहीं चलता। वे यह कह रहे हैं कि अगर दूसरी जाति में प्यार करें तो बताकर करें ताकि सामने वाले की जिंदगी बर्बाद न हों।

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