मुजफ्फरपुर बालिका गृह: बेटियों की सुरक्षा के सरकारी ठेकेदार ही बने हैवान

बिहार के मुजफ्फरपुर से जो कुछ आजकल में देश के सामने आया है, जून में ही उस मामले का खुलासा हो चुका था लेकिन इतनी बड़ी खबर को दबाने की कोशिश की गई। यह भी आज के समाज का शर्मनाक सच है। बालिका गृह में आश्रय पाई अनाथ और बेसहारा 7 से 15 साल की बच्चियों के साथ जो कुछ हुआ वह बताता है कि हमारा समाज जंगल से भी बदतर जगह है जहां इंसान के वेश में न जाने कितने हैवान घूम रहे हैं जिनको पहचानना बहुत मुश्किल हो चला है और जिनको जानवर कहना भी अब जानवरों का अपमान होगा। उनसे कहीं अच्छे जानवर हैं।

muzaffarpur balika home

यह सुनकर ही रूह कांप जाती है कि 29 बच्चियों के साथ रेप की पुष्टि हुई। यही नहीं, जिन बच्चियों ने इनकार किया उसको प्रताड़ना देकर मार दिया गया। कई बच्चियों के शरीर पर जलाने और जुल्म के निशान मिले हैं। उन बच्चियों को इन सबके लिए तैयार महिलाएं ही करती थीं। लड़कियों के साथ ऐसी क्रूरता का पर्दाफाश तब हुआ जब मुंबई की प्रतिष्ठित संस्था TISS वहां पड़ताल करने पहुंची। अगर बिहार की ही कोई संस्था जाती तो उसे मैनेज कर लिया जाता।

बेटियों की सुरक्षा की बात करने वाली, उनकी सुरक्षा का ठेका लेने वाली समाजिक संस्था में बच्चियों की भलाई की आड़ में ये तथाकथित समाजसेवी, नेता, अधिकारी उनके शरीर को नोंचते रहे…कितना खौफनाक समाज है ये…बच्चियों को नशे का इंजेक्शन और गोलियां खिलाकर समाज के सफेदपोशों ने उनका यौन शोषण किया। इंसान की खाल में ये कौन जीव हैं जो इस समाज में रसूखदार बने घूमते हैं।

ऐसा देश में पहली बार नहीं हुआ है। पहले भी कई बालिका गृहों में ऐसे यौन शोषण के मामले हुए जिसमें हरियाणा के अपना घर का मामला काफी चर्चित रहा था। वहां भी बालिकाओं के साथ वैसा ही कुछ हुआ था जो बिहार में हुआ है। जिन बेटियों की सुरक्षा करने का दावा सरकार करती है, उनकी सुरक्षा का जिम्मा उन हैवानों को सौंप देती है जो उनके शरीर को खुद भी नोंचते हैं और समाज सुधार के अन्य ठेकेदारों, नेताओं और अधिकारियों के हवाले कर देते हैं।

यह समाज जंगल से भी खराब जगह है। इससे भी खराब यह है कि इस समाज को खराब बनाने वाले सफेदपोशों की यहां बड़ी इज्जत है जो अपनी ताकत की आड़ में घिनौना खेल खेलते हैं। अब इससे घिनौना क्या होगा कि जिन बेटियों की सुरक्षा का जिम्मा लिया, उन्हीं के साथ हवस का खेल खेलने लगे। इसी से पता चलता है कि यह समाज बेटियों के बारे में क्या सोचता है और उसे किस नजर से देखता है। सवाल वही है कि यह हवस देश को कहां ले जाएगी…

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