noida love story

बेटा शादीशुदा लड़की से प्यार करने लगा तो इसे देख मां बीमार पड़ गईं…

मैं सुरेंद्र हूं। मेरी मौसी का एक ही बेटा है जो दिल्ली में रहकर जॉब कर रहा है। उसकी जो बात मैं बताने जा रहा हूं वो मुझे अपनी मां से पता चली है। मां ने बताया है कि मौसी बहुत परेशान रहती है, किसी काम में मन नहीं लगता, कमजोर और दुबली होती जा रही है। इन सबका कारण है उनका बेटा जो अपनी मर्जी से शादी करने की बात कहता है। वह एक ऐसी शादीशुदा लड़की से प्यार करता है, जो अपने पति को छोड़ आई है और उसकी 4 साल की एक बेटी भी है।

यह लड़की उसके कॉलेज के दिनों में फ्रेंड रही थी। वह काफी अच्छे पैसे वाले घर से है। यह नहीं पता है कि उसने अपने पति को क्यों छोड़ा? मौसी का बेटा अब फैमिली के लोगों से ठीक से बात नही करता, ना ही किसी प्रोग्राम में आता है। पहले वो ऐसा नहीं था। अब बदल गया है। मैं भी चाहकर उससे इस बारे में बात नहीं कर सकता क्योंकि उसने अपनी मां को किसी को भी बताने से मना किया है।

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मौसी डरती है कि बताने से वो कुछ गलत कदम ना उठा ले। वो बहुत रोती है कि मेरा बेटा मुझे वापिस मिल जाए इसलिए वो किसी को कुछ नहीं बताती। फिर भी उन्होंने मेरी मां को बताया है और मां ने मुझे बताया। मौसी गांव में रहती है और बेटे ने घर आना जाना भी बहुत ही कम कर दिया है।

मौसी कहती है कि मुझे अपना बेटा चाहिए। उस घर में मौसा को अलावा दादी है। मौसी कहती है कि बेटे की शादी उसी लड़की से कर देती लेकिन वो एक बच्ची की मां है तो गांव वाले क्या कहेंगे। मौसी अब घुटन में जी रही है। मै भी सोचकर परेशान रहता हूं, समझ नहीं आता क्या किया जाये…

प्यार के बारे में दो अलग पीढ़ियों के विचार

यह अलग-अलग दो पीढ़ियों की समस्या है। मां सोचती है कि गांव के लोगों को क्या जवाब देगी और एक बच्ची की मां से उसका बेटा शादी करेगा तो जैसे अनर्थ हो जाएगा। साथ ही डर यह भी है कि अगर वो पहले पति को छोड़ सकती है तो उनके बेटे को भी छोड़ सकती है।

अब बेटा कॉलेज के जमाने से ही लड़की को जानता है। दोनों में अफेयर है। लड़की पति से अलग हो चुकी है। अब कॉलेज के जमाने का प्रेम फिर जागा होगा तो प्रेमिका को इस हालत में देखकर वो उसे नहीं छोड़ सकता। बेटे को मां से ज्यादा प्रेमिका की चिंता है। मां बीमार होती जा रही है और उधर बेटा मां के विचारों की वजह से घर से दूर होता जा रहा है। सिर्फ मां ही नहीं, पिता भी इस शादी के खिलाफ होंगे।

एक तरफ इकलौते बेटे की मां का प्यार…दूसरी तरफ बेटे के कॉलेज का प्यार…ऐसे हालात में आखिर में क्या होगा…बेटा प्रेमिका से शादी करेगा चाहे जो अंजाम हो, घर से दूर हो जाएगा…उधर मां-बाप बीमार होते चले जाएंगे और बेटे यानी बुढ़ापे के सहारे को खो बैठेंगे। मैंने समाज में ऐसे कई मामले को देखा है, वहां यही होते देखा है। आपलोगों का भी शायद यही अनुभव होगा।

नई पीढ़ी झुकती नहीं, पुरानी पीढ़ी समझती नहीं और अंजाम बुरा होता है। दो पीढ़ियों की समस्या को सुलझाया तभी जा सकता है जब पुरानी पीढ़ी नई पीढ़ी को अपनी मर्जी के लिए स्पेस दे हलांकि इसके बाद पुरानी पीढ़ी को समाज के सवालों का सामना करना पड़ता है। नई पीढ़ी को दिल्ली जैसी जगह में समाज का सामना ही नहीं करना पड़ता। लोग अलग-अलग समय और परिस्थति में फंसे होते हैं और फैसला नहीं ले पाने की वजह से मन और शरीर से बीमार हो जाते हैं।

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