woman employment

औरत कमाती है, घर का खर्चा चलाती है तो समाज उसे अच्छा क्यों नहीं कहता!

मैं प्रमिला प्रजापति हूं गुजरात से हूं। मेरी कहानी इस पेज पर पोस्ट हुई है लेकिन मैं एक और बात कहना चाहती हूं हमारे समाज के बारे में। मेरा आप लोगों से ये सवाल है कि क्या औरत घर का खर्च नहीं उठा सकती? क्या उसकी कमाई से घर नहीं चलता? हमारे समाज में लोग ऐसा बोलते हैं कि औरत के कमाने से थोड़े ही घर चलता है, वो तो मर्द ही कमाता है।

मैं पिछले 10 साल से अपने घर का खर्चा उठाती आ रही हूं लेकिन कभी समाज ने मेरी पीठ नहीं थपथपाई। लोग देखकर भी अनदेखा कर देते हैं। लोग जानते हैं कि मैं कितना काम करती हूं लेकिन फिर भी किसी ने कभी मेरी प्रशंसा नहीं की। यहां तक कि मेरे पति ने कभी किसी से नहीं कहा कि देखो मेरी बीवी ही मेरा घर चला रही है। ईगो बीच में आता है।

premila prajapati feelings

समाज में कोई अच्छा करके, खूब मेहनत करके आगे बढ़े यह किसी को अच्छा नहीं लगता। मैं दिन-रात मेहनत करती हूं फिर भी आज तक मुझे समझनेवाला कोई मिला नहीं। मैं अपने बच्चों के लिए जीती थी, जीती हूं और जीती रहूंगी, मेहनत करती रहूंगी चाहे जिसको जो कहना है कहे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।

मेरे बच्चे भूखे सोते थे तो समाज के लोग नहीं आए थे रोटी देने तो उनको हमारी जिंदगी में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। समाज में लड़कियों की इज्जत होगी तभी समाज सुधरेगा। लड़की अगर 9 महीने पेट में बच्चे को रखकर जन्म दे सकती है तो उसमें इतनी शक्ति है कि वो कुछ भी कर सकती है। कभी किसी को कमजोर मत समझो।

पेज एडमिन राजीव की बात
प्रमिला जी, समाज ने औरतों से उसकी आर्थिक ताकत इसलिए छीन ली ताकि वो मर्दों पर उम्रभर डिपेंड रहे और इसके पीछे सबसे बड़ा तर्क यह दिया जाता है कि घर में बच्चे को कौन पालेगा इसलिए औरत को घर के अंदर के कामों तक सीमित कर दिया गया। इसके लिए समाज ने कई तरह के हथकंडे अपनाए हैं जिसमें परिवार में ही बेटी को शुरू से कमजोर बनाया जाता है ताकि उसके अंदर किसी मर्द पर निर्भरता की मानसिकता विकसित हो। पहले वो पिता-भाई पर निर्भर बनाई जाती है, फिर बाद में पति-बेटे पर।

इस निर्भरता का खराब नतीजा यह हुआ कि मर्दों पर परिवार का सारा आर्थिक बोझ पड़ा जिसकी वजह से घर में पैसा भी कम आता है, मर्दों की परेशानियां भी बढ़ जाती हैं, औरत को पैसों के लिए पति का मुंह ताकना पड़ता है, साथ ही अगर कभी पति की मौत हो जाए तो औरत की जिंदगी बर्बाद होती है और परिवार तबाह हो जाता है।

इस धरती पर जो भी जीव जन्म लेता है, उसे अपने लिए कमाने का अधिकार है, उसे अपना पेट पालने का अधिकार है। चाहे लड़का हो या लड़की, दोनों को यह सोचना चाहिए कि उनको अपनी जिंदगी खुद चलानी है, खुद के लिए कमाना है, इससे वो किसी पर डिपेंड नहीं होंगे। इससे उनके अंदर आत्मविश्वास आएगा जिससे वो जीवन में और बेहतर करेंगे तो समाज और बेहतर होगा। लड़कियां किसी पर निर्भर होने की सोच को खत्म करें…इससे समाज में बहुत बड़ा बदलाव होगा।

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