court marriage

फौजी पति के जुल्मों की शिकार एक पढ़ी लिखी संवेदनशील लड़की की लव-मैरिज स्टोरी

मैं रंजना उत्तराखंड से हूं। मैंने एमए बीएड तक पढ़ाई की है। 2009 में मैंने लव मैरिज की थी जिसके बाद पढ़ाई छूट गई। शादी से पहले मेरे हसबैंड बहुत अच्छे इंसान थे लेकिन शादी के पहले दिन से ही उनकी सारी बातें बदल गईं क्योंकि मैं दहेज में उनके मम्मी पापा की अपेक्षा के मुताबिक सामान नहीं ला पायी थी। उनके मम्मी पापा ने उनको मेरे खिलाफ भड़काया और शादी के दूसरे तीसरे दिन से ही मेरे साथ पति ने बात करनी बंद कर दी और मारपीट भी करने लगे। मैं उनसे बहुत प्यार करती थी इसलिए मैंने उनका साथ नहीं छोड़ा।

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मेरे पति भारतीय सेना में हैं। फौज में होने की वजह से हम दोनों साल में तीन या चार बार ही मिल पाते हैं मगर मुलाकात के दिनों में एक दिन भी चैन से नहीं गुजरता है। कुछ महीने पहले जब वो घर आए तो मेरे बनाए ब्रेकफास्ट को खराब बताकर उन्होंने मुझे इतना मारा-पीटा कि हॉस्पिटल में एडमिट होना पड़ा। मेरे ससुराल वाले कहने लगे कि पुलिस में कंप्लेन करोगी तो परिवार बर्बाद हो जाएगा, पति कहने लगे कि आगे से वो मेरे ऊपर हाथ नहीं उठाएंगे। मेरी दो बेटियां हैं, उनके बारे में कहने लगे कि उनकी जिंदगी खराब हो जाएगी। मैं यह सब सोचकर शांत रह गई और माफ कर दिया।

मगर इसके बाद भी मेरे ऊपर जुल्म नहीं रुके। कुछ दिनों बाद फिर मेरे पति मुझे मेंटली टॉर्चर करने लगे। बिना गाली के वे बात ही नहीं करते। मुझे लगता है कि इस बार घर आएंगे तो फिर वो मुझे मारेंगे। मैं उत्तराखंड में ऐसी जगह से हूं जहां तलाक के बारे में सोचना भी पाप है। मेरे अपने घर में मेरी मम्मी नहीं है। पापा ने दूसरी शादी की थी। सौतेली मां और पापा मेरा साथ नहीं देते। दो बेटियों के फ्यूचर के बारे में सोचकर दस साल से मैं ये सब बर्दाश्त किए जा रही हूं। सोचा कि शायद मेरे पति कभी सुधर जाएंगे लेकिन मुझे नहीं लगता कि वो कभी बदलेंगे।

मेरे पति चार भाई हैं। मैं घर की सबसे बड़ी बहू हूं लेकिन मेरी कोई इज्जत नहीं। बाकी सभी भाई अपनी बीवी के साथ खुश हैं। मेरे पति घर में सबके सामने मेरी इंसल्ट करते हैं। मेरा साथ कोई नहीं देगा। मैं अपनी बेटियों को लेकर कहां जाऊं। मेरे सास ससुर भी यही चाहते हैं कि मैं घर छोड़कर चली जाऊं। मुझसे अब ये सब बर्दाश्त नहीं होता। पापा से एक बार कहा तो उन्होंने कहा कि अब तेरा घर वही है, पति ही सबकुछ होता है। मेरा सुसाइड करने का मन करता है मगर बेटियों को किसके भरोसे छोड़कर जाऊं, इसलिए मर भी नहीं पाती।

मेरे लिए अब पति के साथ रिश्ता निभाना बहुत मुश्किल हो रहा है। मैं किसी से भी अब अपना दर्द कह नहीं सकती। पापा से कहकर भी देख चुकी। अब कहीं से कोई उम्मीद नजर नहीं आती। मैं ये सब बातें बहुत रो-रोकर लिख रही हूं। क्या सचमुच मेरे लिए दुनिया के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं? क्या इस टॉर्चर से निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा है? मेरी बेटियां नहीं होती तो शायद में सुसाइड कर चुकी होती लेकिन उनका ख्याल आते ही चुप हो जाती हूं। मैं क्या करूं?

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One thought on “फौजी पति के जुल्मों की शिकार एक पढ़ी लिखी संवेदनशील लड़की की लव-मैरिज स्टोरी”

  1. मैं सिर्फ आपसे इतना कहूंगा कि खुद से आज आप एक सवाल करिये की कल को आपकी बेटियो के शादी के बाद भी अगर आप जैसा ही बर्ताव हुआ तो इन सबका जिम्मेदार और दोषी कौन होगा?
    आप होंगी और कोई नही क्योंकि अपने उन्हें अपने हक अपनी खुशियो के लिए लड़ना नही सिखाया सिर्फ समझौता करना सिखाया? आपकी मदद तब तक कोई नही कर सकता जब तक की आप खुद नही करेंगी? आपको भी जिने का हक है अपनी खुशियो के लिए।

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